ज्योति को चोद-चोद कर शोला बना दिया

उसके गोरे सपाट पेट को चूमते हुए मेरी नजर उसकी जांघों के बीच में उसकी कमसिन चूत पर कसी पैंटी पर ही गड़ी हुई थी. उसके पेट को चूमते हुए मैंने उसकी नाभि में जीभ घुसाई.. नाभि में जीभ लगते ही उसके पूरे बदन में बिजली दौड़ने लगी. उसका पेट कांपने लगा. वो जांघों को ऊपर की ओर सिकोड़ कर अपना बचाव करना चाह रही थी लेकिन मैंने हाथों के जोर से उसकी जांघों को नीचे ही दबा दिया.

Unknown

3/23/20261 min read

दोस्तो, मेरा नाम अमित है. मेरी उम्र 21 साल है. मैं नागपुर के पास ही एक छोटे शहर से हूं. मेरा भाई बिजनेस मैन है. उसकी शादी पूणे में हुई है.

मेरी भाभी ममता और मेरे भैया पहले से एक दूसरे से प्यार करते थे और फिर घरवालों की रज़ामंदी से उन दोनों की शादी करवा दी गयी.

भाभी की एक छोटी बहन है जिसका नाम ज्योति है. ज्योति एक 20 साल की जवान लड़की है. वह कॉलेज में पढ़ रही है.

भैया की शादी के तीन महीने बाद ही मैंने ज्योति को सेट कर लिया था.

भाभी को भी पता था कि ज्योति और मेरे बीच में कुछ चल रहा है.

दरअसल जब मैंने ज्योति को 15 हजार की रिंग गिफ्ट में दी थी तभी से भाभी को हमारे प्यार के बारे में पता लग गया था.

फिर दोस्तो, मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और मेरी भी सरकारी नौकरी लग गयी.

अब ज्योति मेरे और करीब आ गयी थी. जब भी मिलना होता था तो हम दोनों कई बार किस भी कर लिया करते थे.

उसके बाद भाभी प्रेग्नेंट हो गयीं. फिर समय गुजरता गया और उनकी डिलीवरी की डेट नजदीक आ गयी. भाभी ने ज्योति को घर बुला लिया. अब ज्योति भाभी की देखभाल करने लगी.

घर में 3 फ्लोर थे. नीचे के फ्लोर में भैया भाभी, बीच में मम्मी पापा और ऊपर मैं रहता था. वहां पर एक और खाली रूम था. ज्योति को उसी रूम में शिफ्ट कर दिया था.

मैं ज्योति को घूरता रहता था. उसकी जवानी देखकर उसको चोदने का मन करता था.

भाभी भी मेरी हरकतों को नोटिस कर रही थी.

उसके अगले दिन मैं उसको शॉपिंग करवाने के लिए ले गया.

हमने वहां पर मूवी भी देखी. उसको मैंने 20 हजार की शॉपिंग करवा दी थी और मूवी देखते हुए ही मैंने उसको गर्म करके चुदाई के लिए मना लिया. वो मान भी गयी थी.

फिर हम शाम के 7 बजे घर पहुंचे. ज्योति को खुश देखकर भाभी को कुछ शक हुआ.

उस वक्त मैं भाभी के पास बैठा था कि तभी मेरा फोन बजा. मैंने पैंट की जेब से फोन निकाला तो साथ ही कॉन्डम के पैकेट भी गिर पड़े.

भाभी ने कॉन्डम देख लिये.

मैंने कहा- भाभी सच कहूं तो आज हमारी पहली रात है.

वो बोली- इतनी जल्दी क्या है? शादी के बाद रोज ही तो करना है.

मैं बोला- भाभी, शादी के बाद तो दिन में पांच पांच बार करूंगा.

इस पर वो हंसने लगी.

दरअसल भाभी मेरा पूरा साथ देती थी और हम दोनों के बीच में हर तरह का मजाक होता था.

वो बोलीं- मेरी बहन बहुत नाजुक है. उसका ध्यान रखना. अपनी ही जायदाद समझकर करोगे तो सही रहेगा.

मैंने कहा- आप चिंता मत करो भाभी, मैं उसका पूरा ध्यान रखूंगा. हम दोनों आपस में एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं.

उसके बाद मैं अपने रूम में आ गया. रात के 10 बज चुके थे.

ज्योति भी अपनी दीदी को गुड नाइट बोलने गयी हुई थी.

भाभी ने उसको अपने पास ही रोक लिया.

फिर ज्योति कहने लगी कि उसको नींद आ रही है.

भाभी को तो पहले से पता था कि आज उसकी कुंवारी बहन की चुदाई होने वाली है. भाभी समझ गयी कि ये चुदने के लिए उतावली हो रही है और इसीलिए बहाने बना रही है. भाभी ने उसको फिर आने दिया.

वो उनको गुड नाइट बोलकर ऊपर आ गयी.

जब वो मेरे रूम में आई तो उसने एक नाइटी पहनी हुई थी. कॉफी कलर की नाइटी उसके गोरे बदन पर बहुत सेक्सी लग रही थी.

मेरे रूम में आकर उसने दरवाजे को अंदर से लॉक कर दिया और चलकर बेड पर आ गयी.

आते ही मैंने उसको बांहों में भरकर दबोच लिया. मैं उसको बेतहाशा चूमने लगा.

वो बोली- जानू … आज तुम्हारी ताकत देखूंगी. काफी जिम-शिम करते हो तुम. तुम्हारी बॉडी की ताकत देखनी है मुझे. तुम्हारा हथियार भी देखना है जिसको तुम वीडियो कॉल पर दिखाते थे. बहुत उछलता था तुम्हारा औजार उन वीडियो कॉल में.

मैं और ज्योति दरअसल वीडियो कॉल में एक दूसरे को नंगे देख चुके थे.

ज्योति मेरे लोड़ाको ‘बहुत बड़ा है’ … कहकर डरती रहती थी.

मैं उसकी चूत को सेक्स चैट और वीडियो कॉल में ही गर्म कर देता था.

उसको मैंने चुदाई के बहुत सुनहरे सपने दिखाये थे.

अब हम दोनों फिर से एक दूसरे को किस करने लगे. मैंने नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.

उसकी चूचियां कसाव में आने लगीं और धीरे धीरे मेरे हाथों से मसले जाने के कारण टाइट हो गयीं.

मैंने उसकी नाइटी को उतार दिया. वो अब ब्रा और पैंटी में थी. उसकी ब्रा और पैंटी दोनों ही लाल थी.

उसके गोरे बदन पर उसकी कसी हुई ब्रा और उसकी गांड और चूत को कवर किये हुए उसकी पैंटी को फाड़ देने का मन कर रहा था.

एक बार फिर से मैंने उसको नीचे पटक लिया और उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही जोर जोर से मसलने लगा. मन कर रहा था कि उसकी चूचियों को भींच भींच कर उसकी चीखें निकाल दूं.

मेरी पकड़ भी इतनी मजबूत थी कि वो सच में चिल्लाने लगी. मगर जितना वो चिल्ला रही थी मुझे उतना ही ज्यादा मजा आ रहा था. रूम बंद था और हम सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर थे इसलिए नीचे आवाज जाने का कोई सवाल नहीं था.

मैं ज्योति की जवानी के भरपूर मजे लूटना चाहता था. काफी देर तक उसके स्तनों को जोर जोर से मसलता रहा और वो कराहने लगी. फिर मैंने उसको पेट के बल पलट दिया.

उसकी पीठ पर उसकी ब्रा की स्ट्रिप्स के पास चूमा तो वो सिहरने लगी. चूसते-चूसते मैं उसकी गांड तक चला गया..

कई चुम्बन देने के बाद मैंने उसकी ब्रा के हुक खोल दिये. जहां पर उसकी ब्रा की पट्टी आकर बंधी हुई थी वहां पर पीठ के ठीक बीच में चूमा.

एकदम से उसकी आह्ह … निकल गयी. फिर तुरंत मैंने उसको पलट कर पीठ के बल कर लिया. उसकी चूचियों पर ब्रा के कप ढके हुए थे. इस हालत में वो निहायत ही सेक्सी लग रही थी.

फिर धीरे से मैंने उसकी चूचियों से ब्रा को उठा दिया.

उसकी गोरी चूचियों की एक झलक ही मिली थी कि उसने अपने दोनों हाथों से अपने लड्डुओं को ढक लिया. ऐसा नहीं था कि ज्योति मेरे सामने इससे पहले नंगी नहीं हुई थी.

फिर मैंने धीरे से उसके हाथों को उसकी चूचियों से अलग किया और उसके गोरे गोरे दो अमरूद मेरे सामने नंगे थे.

चूचियों की इतनी गोल शेप मैंने कभी पोर्न फिल्म में भी नहीं देखी थी.

उसके निप्पल लगभग गुलाबी रंग के थे. मैंने उसकी चूचियों के तने हुए निप्पलों पर पहले एक एक किस किया और फिर बाईं चूचियों को आराम से मुंह में भर लिया.

मेरे गर्म होंठ उसकी चूचियों पर लगे तो उसके मुंह से सीत्कार निकलने लगे.

मस्ती में आकर मैं उसकी चूचियों को पीने लगा.

क्या बताऊं दोस्तो, इतना मजा आ रहा था उसकी नर्म नर्म कोमल चूचियों को पीने में कि मन कर रहा था कि सारी उम्र इन चूचियों के दूध को ऐसे ही पीता रहूं.

दस मिनट तक मैं एक चूचियों को ही पीता रहा. उसके बाद फिर दूसरी चूचियों पर मुंह लगाया और चूसने लगा.

मेरा हाथ अब पहली चूचियों को हल्के हल्के दबा रहा था.

मेरी लार से उसकी चूचियों एकदम चिकनी हो गयी थी.

बीच बीच में मैं अपनी पहली उंगली और अंगूठे के बीच में उसकी चूचियों के निप्पल को जोर से भींच देता था.

इस मजे में वो मेरे सिर को अपनी छाती में दबा लेती थी. उसकी चूत की गर्मी अब हर पल बढ़ती जा रही थी.

मेरा लोड़ामेरी लोअर में तना हुआ उसकी पैंटी के ऊपर उसकी चूत पर चुभ रहा था. वो कह रहा था कि इस लोअर और इस पैंटी की दीवार को हटा दो. मुझे मेरी मंजिल तक जाने दो.

मैं अपने लोड़ाकी हालत समझ रहा था. मगर ज्योति की रसीली चूचियों को छोड़ने का मन भी नहीं कर रहा था. उसकी चूचियों को पी पीकर मैंने लाल कर दिया. ऐसा लग रहा था देखकर कि जैसे गोरी अंग्रेजन की चूचियों को भींच कर सुजा दिया गया हो.

जब ज्योति से चूचियों का दर्द बर्दाश्त न हुआ तो उसने मुझे हटा दिया. मैंने भी उसकी पीड़ा समझी और मैं अपनी मंजिल की ओर नीचे की तरफ कदम बढ़ाने लगा.

उसके गोरे सपाट पेट को चूमते हुए मेरी नजर उसकी जांघों के बीच में उसकी कमसिन चूत पर कसी पैंटी पर ही गड़ी हुई थी. उसके पेट को चूमते हुए मैंने उसकी नाभि में जीभ घुसाई.

नाभि में जीभ लगते ही उसके पूरे बदन में बिजली दौड़ने लगी. उसका पेट कांपने लगा. वो जांघों को ऊपर की ओर सिकोड़ कर अपना बचाव करना चाह रही थी लेकिन मैंने हाथों के जोर से उसकी जांघों को नीचे ही दबा दिया.

उसकी नाभि को चूस चूस कर उसको कई मिनट तक तड़पाया. उसकी हालत खराब होने लगी. अब मैं असली माल की ओर बढ़ चला. उसकी पैंटी के में से हल्के हल्के रोयें बाहर की ओर झांकते दिख रहे थे.

मैंने उसकी पैंटी को हल्का सा नीचे की ओर किया और उसकी चूत के ऊपर वाले हिस्से पर अपने होठों से प्यारा से चुम्बन दे दिया. वो एकदम से सिसकार उठी. मैने धीरे-धीरे चुंबन को आगे बढ़ाया और भयंकर

चुसाई करने लगा..उसके मुंह से जोर जोर की सिसकारियां फूटने लगीं- आह्ह … अमित आह्ह … नो … उम्म … मत करो … ऊईई … आह्ह … नहीं … आआह आआऊऊ … म्म्म … मम्मी … आह्ह मर गयी … आह्ह आआ आ आ … रुक जाओ!

इतना चूसा की 1 बार वो चूसने-चूसने में ही झड़ गई..

तीन चार मिनट की चुसाई के बाद ही वो मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. उसकी चूत से निकल रहा मादक सा रस मुझे उसकी चूत को जैसे काटकर खा जाने के लिए प्रेरित कर रहा था.

मैंने उसकी पैंटी को पूरी नीचे खींच दिया और उसकी टांगों से निकाल कर बाहर ही कर दिया. अब ज्योति मेरे सामने पूरी की पूरी नंगी पड़ी हुई थी. मैंने उसकी चूत के होंठों पर हल्का सा गर्म किस किया और वो एकदम से सिसकार उठी.

मैंने उसको उठने के लिए कहा. वो उठ बैठी. फिर मैं नीचे लेटा और उसको मेरे मुंह पर चूत रखकर लेटने के लिए कहा. वो मेरे चेहरे के ऊपर आई और अपनी चूत को मेरे मुंह पर लगा दिया.

उसकी गांड को थामकर मैंने एक बार फिर उसकी चूत में जीभ दे दी और जोर जोर से चोदने लगा. अब पोजीशन ऐसी थी कि उसकी गांड मेरे चेहरे के ऊपर छत की ओर थी. उसका धड़ मेरे सिर के आगे की ओर था. उसकी टांगें मेरे लोड़ातक पहुंच रही थीं.

मैं तेजी से उसकी चूत में जीभ को अंदर बाहर किये जा रहा था और वो जैसे अपनी गांड को ऊपर नीचे करके मेरे मुंह को ही चोदने लगी थी. उसकी चुदास इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी कि वो जोर जोर से आवाजें करने लगी.

उसके मुंह से कामुक सीत्कारें बरसने लगीं- आह्ह … अमित … ओह्ह माय गॉड … ओह्ह … आह्ह … ओह्ह फक … आआआ हहह … ओ नो … स्स्स … आह्ह श्श्स्स … गयी … आह्ह गयी मैं.

इतना कहते ही उसकी चूत ने पचर पचर पानी छोड़ दिया और उसकी चूत के रस से मेरा सारा चेहरा भीग गया. उसके बदन में बिजली के से झटके लगने लगे और वो मेरे मुंह पर चूत पटकती हुई शांत होती चली गयी.

फिर थक कर वो एक तरफ गिर गयी और बुरी तरह से हांफने लगी. मेरे लोड़ाको मैंने देखा तो वो मेरी लोअर के एक बड़े हिस्से को अपने प्रीकम से भिगो चुका था.

(यह कहानी काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।)