दो जाटों का एक साथ लौड़ा लिया
वह मेरी चूचियाँ ऊपर से दबाने लगा तो मैं भी नीचे हाथ किये हुए उसका लोड़ा टटोलने लगी।
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Unknown
6/15/20261 min read
मैं 25 साल की एक वर्किंग गर्ल हूँ, अब पुणे में रहती हूँ।
होने को तो मैं एक हिज़ाब वाली लड़की हूँ पर मैं उन लड़कियों की तरह रहती नहीं हूँ।
मैं बुर्का कभी इस्तेमाल नहीं करती और मैं सलवार सूट भी ज्यादा नहीं पहनती।
मुझे साड़ी पहनने का बड़ा शौक है, मैं साड़ी अक्सर पहनती हूँ और उसके नीचे एक छोटी सी ब्रा!
ब्रा भी ऐसी जो मेरे निपल्स को तो छुपा कर रखती है लेकिन बाकी चूचियों का उभार खुला छोड़ देती है।
इसी उभार में मर्द भोसड़ी वाले अपने आप चिपक जाते हैं।
ब्लाउज़ तो … बहन चोद … मैं पहनती ही नहीं।
मेरे बदन पर साड़ी बहुत अच्छी लगती है। उसमें मेरी गांड धमाका लगती है.. और मैं बवाल मचाए रखती हूं
मेरी गोल गोल खूबसूरत बांहें और मेरी मस्त मस्त बड़ी बड़ी चूचियाँ किसी को भी पागल बनाने के लिए काफ़ी हैं।
ऊपर से मेरी मोटी मोटी जांघें और साड़ी के लिबास में मस्तानी चाल किसी को भी लुभा सकती है।
जो भी मुझे देखता है वह बड़ी देर तक देखता ही रहता है।
ऊपर से मैं भोली भाली एक संभ्रांत महिला दिखाई पड़ती हूँ पर अंदर से मैं मादरचोद बड़ी वाली रांड हूं
मैं रोज़ दो पैग शराब पीती हूँ और शराब के साथ लोड़ा पीती हूँ।
शराब का नशा तो घंटे दो घंटे में उतर जाता है पर लोड़ा का नशा मेरे दिमाग से कभी उतरता ही नहीं!
मेरे दिमाग में लोड़ा बहनचोद हमेशा घूमते ही रहते हैं.
मैं अपनी कमसिन उम्र से लोड़ा पकड़ रही हूँ और तब से आज तक कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
लोड़ा पे लोड़ा पकड़ती गई और फिर लोड़ा पे लोड़ा पेलवाना भी शुरू कर दिया था अपनी चूत में!
जी हाँ, मैं अब तक जाने कितने लोड़ा पेलवा चुकी हूँ अपनी चूत में लेकिन जितने लोड़ा पेलवा चुकी हूँ उससे दूने लोड़ा पेलवाना चाहती हूँ।
वैसे मुझे लोड़ा ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती।
खुदा ने मुझे इतना हुस्न दिया है, इतनी खूबसूरती दी है, इतना सेक्सी और हॉट जिस्म दिया है कि लोड़ा भोसड़ी वाले खुद ही चलकर मेरे पास आ जाते हैं.
मैं मुस्कराती हुई थोड़ा जलवा दिखा देती हूँ तो लोड़ा साले खड़े होकर मेरी सलामी बजाने लगते हैं।
जितने लोड़ा मेरे संपर्क में आते हैं, मैं वो सब अपनी चूत में पेलवा लेती हूँ।
मैं बुर चोदी बहुत बड़ी चुदक्कड़ औरत हूँ।
एक दिन बहुत तेज बरसात हो रही थी।
मैं एक जगह रुक गयी और बड़ी देर तक रुकी रही।
पानी जब थोड़ा सा हल्का हुआ तो मैं सड़क पर आ गयी और किसी सवारी का इंतज़ार करने लगी।
हालांकि छतरी मेरे हाथ में थी लेकिन पुणे की बरसात छतरी कहाँ झेल पाती है?
मैं बुरी तरह भीगी हुई थी।
तभी अचानक एक कार मेरे सामने रुकी।
कार वाले ने पूछा- मैडम कहाँ जाना है?
मैंने उसकी शक्ल देखी।
मुझे वह एक शरीफ आदमी लगा तो मैंने कहा- मुझे परेल तक जाना है।
उसने बैठने का इशारा किया तो मैं कार में बैठ गयी।
वह बोला- मैं आपको छोड़ दूंगा!
लेकिन जब हम परेल के पास पहुंचे तो वहां पानी बहुत भरा था।
वह बोला- मैडम, अब आगे नहीं जा सकता। मेरा घर यहीं है। आप मेरे साथ ही चलिए।
मैं थोड़ा झिझकी जरूर पर फिर हिम्मत करके उसे साथ चल पड़ी।
वह मुझे अपने घर ले गया।
उसने मुझे कुर्सी पर बैठाया और बोला- मैडम आप बाथरूम में जाइये और अपने कपड़े वाशिंग मशीन में डाल दीजिये। फिर ये बड़ी सी तौलिया लपेट कर एक शाल ओढ़ कर बैठ जाइये। गीले कपड़ों में आपको बुखार आ जायेगा। कपड़े थोड़ी देर में सूख जायेंगें फिर पहन लेना।
मैंने वही किया जो उसने कहा था।
तब तक बरसात फिर बड़ी जोर से होने लगी।
वह बोला- आज शायद बारिश बंद नहीं होगी।
मैंने कहा- लग तो ऐसा ही रहा है।
इतने में उसने बिना कुछ पूछे मुझे व्हिस्की का एक पैग पकड़ा दिया गर्म पानी के साथ!
मैं तो चाहती ही थी उसके साथ वक्त बिताना तो मैंने ख़ुशी ख़ुशी पकड़ लिया गिलास!
फिर हमने चियर्स कहा और शुरू हो गए।
बस यहीं से मेरी कहानी बदल गयी।
मैं उसके लोड़ा के बारे में सोचने लगी।
मेरा मन हुआ कि मैं इसका लोड़ा पकड़ कर मुंह में ले लूँ।
शराब में डुबो डुबो कर चाटूं लोड़ा और लोड़ा का सुपारा!
मेरी चूत यह सोचते ही गीली हो गयी।
फिर मैं अपनी झलक दिखाने की कोशिश करने लगी।
मैं अपने लम्बे लम्बे बाल झटकने लगी, अपनी आँखें मटकाने लगी और मंद मंद मुस्कराने लगी।
वह बोला- मैडम, आप बहुत खूबसूरत हैं।
मैं बोली- यार, मैं मैडम नहीं हूँ काम्या हूँ। मुझे सिर्फ काम्या ही कहो!
उसने कहा- मैं अनिल हूँ अकेला ही रहता हूँ।
बस मेरी आग और भड़क गई।
मैंने मन में कहा ‘यह तो और अच्छा है.’
फिर मैं सोचने लगी कि देखो न मेरे सामने कितना बढ़िया लोड़ा है और मैं ले नहीं पा रही हूँ।
मेरा मन हुआ कि मैं उसकी लुंगी में हाथ घुसेड़ दूँ।
तब तक उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैंने ऐतराज़ नहीं किया।
उसने मुझे अपनी तरफ खींचा तो भी मैं खिंचती चली गयी।
उसने मुझे अपने बदन से चिपका लिया तो मैं भी चिपक गयी।
उसने मेरी चुम्मी ली तो मैंने भी उसकी चुम्मी ले ली।
वह मेरी चूचियाँ ऊपर से दबाने लगा तो मैं भी नीचे हाथ किये हुए उसका लोड़ा टटोलने लगी।
हमने एक दूसरे को अपनी मंशा ज़ाहिर कर दी।
उसने मेरी शॉल में हाथ डाल कर मेरी नंगी चूचियाँ पकड़ ली तो मैंने भी उसकी लुंगी में हाथ घुसेड़ कर उसका लोड़ा पकड़ लिया।
मेरे मुंह से अनायास ही निकला- लगता है कि बहुत बड़ा है तेरा भोसड़ी का लोड़ा?
मेरी इस बात ने उसके लोड़ा की आग और भड़का दी।
उसने मेरी शॉल उतार कर फेंकी तो मैंने उसकी लुंगी खींच कर फेंक दी।
मेरी चूचियाँ उसके सामने एकदम नंगी हो गयीं तो उसका लोड़ा मेरे सामने एकदम नंगा हो गया।
मैंने फिर अपनी बेशर्मी दिखाई और उसके सारे कपड़े खोल डाले और मुस्कराती हुई बोली- तुम नंगे नंगे बड़े अच्छे लग रहे हो अनिल! तुम्हारा बिना कटा लोड़ा मजा देने वाला होगा.
उसने भी मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगी कर दिया और बोला- तुम भी नंगी बहुत अच्छी लग रही हो काम्या!
मैंने बड़े प्यार से कहा- तेरी काम्या बहुत बड़ी मादरचोद है अनिल! ज़रा बच के रहना … तेरे लोड़ा का पूरा मज़ा ले लेगी बुरचोदी काम्या! तेरे लोड़ा पे बैठकर चोद डालेगी तेरा लोड़ा! तेरे लोड़ा को बना देगी चूहा.
वह बोला- जो बात मुझे कहना चाहिए वो तो तुम कह रही हो काम्या!
मैंने कहा- तुम हो एक शरीफ आदमी और मैं हूँ बुरचोदी एक बड़ी बेशरम लोड़ा की दीवानी लड़की. मेरे हाथ में जब लोड़ा आता है तो मैं उसे देख कर पागल हो जाती हूँ। और फिर कुछ भी बोलने लगती हूँ।
उसने मुझे नंगी नंगी अपने नंगे बदन से चिपका लिया और फिर मुझे बेड पर पटक दिया।
एक हाथ से मेरी चूचियाँ सहलाने लगा और दूसरे से मेरी चूत!
मैं उसका लोड़ा चाटने लगी तो वह मेरी बुर चाटने लगा।
हम दोनों बन गए 69.
फिर वह घूमा और मुझे चित लिटा कर मेरी चूत में पेल दिया अपना मोटा लोड़ा … बड़ी बेरहमी से चोदने लगा मेरी बुरचोदी चूत!
मैं भी उसका साथ देने लगी, झटके पे झटके मारने लगी, कमर हिला हिला के चुदवाने लगी।
मेरे मुंह से इसी मस्ती में कुछ न कुछ निकलने लगा- उई अम्मी … बड़ा मस्त लौड़ा है तेरा … मज़ा आ रहा है ऊँ आ हो … हांह ऊँहूँ आ … हो वॉव और चोदो … खूब चोदो … हां हूँ चूसो चप्प चप्प … साला तू बड़ा चोदू है तेरी बहन की बुर! तेरी माँ की चूत … आज मौक़ा है चोद ले मेरी चूत। कल मैं तेरी बहन की बुर चोदूँगी। हां होओं हां क्या मस्त चुदाई है … मुझे इतनी अच्छी तरह से किसी ने नहीं चोदा। तुम खूब चोद लो मेरी फुद्दी … मेरी गांड भी चोद लो मेरे राजा! आज जो चाहो कर लो, मैं तेरी प्रेमिका हूँ, तेरी बीवी हूँ, तेरी रंडी हूँ, तेरी चुड़क्कड़ भाभी भी हूँ, तेरी चुदासी पड़ोसन हूँ। मैं इस समय सातवें आसमान में हूँ. ये सब तेरे लोड़ा का कमाल है मेरे राजा … मुझे चोदे जाओ … खूब चोदो … चीर डालो मेरी बुरचोदी चूत!
फिर मैंने उसे चित लिटा दिया।
उसका टनटनाता हुआ लोड़ा छत ताक रहा था।
मैंने वहीं पर रखी तेल की शीशी से तेल निकाला और लोड़ा पर लगा कर लोड़ा की मालिश करने लगी।
लोड़ा एकदम चिकना हो गया। तेल लगाने से लोड़ा चमकने लगा।
उसे देख कर मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी।
मालिश करते करते मैं टांग उठाकर लोड़ा पे बैठ गयी। लोड़ा सट्ट से पूरा मेरी चूत में घुस गया।
मैं मस्त हो गयी और अपनी गांड उठा उठा कर लोड़ा पर पटकने लगी।
मैंने कहा- देख अनिल, इसे कहते हैं लोड़ा चोदना! मैं तेरा लोड़ा चोद रही हूँ भोसड़ी के अनिल! आज तक किसी ने भी तेरा लोड़ा नहीं चोदा होगा?
वह बोला- हां यार, वाकयी किसी ने नहीं चोदा। तेरी चूत बड़ी दमदार है यार! मेरा लोड़ा बहनचोद अच्छी तरह चुद रहा है।
मज़ा मुझ भी खूब आ रहा था और उसे भी!
फिर तो मैं खलास हो गयी और वह भी खलास होने वाला था।
मैं नीचे उतरी और लोड़ा का सटासट मुठ मारने लगी।
तब लोड़ा ने उगल दिया सारा वीर्य!
उसके बाद हम दोनों बाथरूम गए।
उसने मेरी चूचियों पर चूत पर और गांड पर साबुन लगाकर मुझे नहलाया।
मैंने भी उसके लोड़ा पर और पेल्हड़ पर साबुन लगा लगा कर खूब नहलाया।
हम दोनों बाहर आ गए और फिर नंगे नंगे ही खाना खाया।
एक घण्टे बाद उसका लोड़ा फिर उठ खड़ा हुआ और मेरी भी चूत ससुरी चुलबुलाने लगी।
वह बोला- काम्या प्लीज एक बार मैं तुम्हें और चोदूंगा।
मैंने कहा- हां हां चोद लो। मुझे तेरा साबुत लोड़ा पसंद है तो मैं खुले मन से चुदवा लूंगी।
उसने मुझे फिर अपने नंगे बदन से चिपका लिया और मेरे पूरे बदन पर हाथ फिराने लगा, मेरा पूरा नंगा जिस्म चूमने लगा।
यहाँ तक की उसने मेरी गांड भी चूमी और चाटी भी!
तब मुझे मालूम हुआ कि अनिल कितना उत्तेजित हो गया है।
मैं भी गनगना उठी और चुदने के लिए अपनी चूत खोलकर तैयार हो गयी।
उसने लोड़ा पेला और पेलता चला गया।
इस बार तो उसका लोड़ा ज्यादा खूंखार नज़र आ रहा था, ज्यादा मोटा लग रहा था।
मुझे भी कुछ ज्यादा ही मज़ा आने लगा और मैं भी कमर हिला हिला के चुदवाने लगी।
वह बोला- यार काम्या, तेरी जैसी चुदवाने वाली लड़की बहुत मुश्किल से मिलती है।
मैंने भी कहा- यार, तेरे जैसा चोदने वाला भी बड़ी मुश्किल से मिलता है।
आज तो मेरा नसीब था जो तेरे जैसा मस्ताना लोड़ा मुझे मिल गया।
चुदाई के बाद हम दोनों सो गए और जब सवेरा हुआ तो वह मुझे अपने घर छोड़ कर चला गया।
एक दिन मैं मैरीन ड्राइव में घूम रही थी।
अचानक मुझे मेरी पुरानी दोस्त शबनम मिल गयी।
वह बोली- अरी काम्या तू बुरचोदी यहाँ कहाँ घूम रही है? माँ चुदाने आयी है तू अपनी यहाँ पुणे में?
मैंने कहा- तू बता भोसड़ी वाली शबनम, तू यहाँ पुणे में कबसे गांड मरा रही है अपनी?
“अरे यार मैं तो यहीं रहती हूँ।”
“तब तो तू हर रोज़ लोड़ा पीती होगी? तू तो बहन की लौड़ी लोड़ा पीने में बड़ी एक्सपर्ट है। कितने लोड़ा पीती है तू एक दिन में?”
“हां यह बात तो पक्की है कि मैं हर रोज़ लोड़ा पीती हूँ। कभी एक लोड़ा पीती हूँ, कभी दो लोड़ा और कभी कभी तो तीन तीन लोड़ा मिल जाते हैं पीने को! यार बड़ा मज़ा आ रहा है यहाँ!”
“अच्छा तो तू माँ की लौड़ी बड़ी अय्याशी कर रही है यहाँ?”
“क्यों न करूँ अय्याशी? जब भगवान ने मुझे खूबसूरती दी है, सेक्सी और हॉट जिस्म दिया है, बड़ी बड़ी चूचियाँ और मस्तानी चूत दी है, रुपया पैसा दिया है तो फिर क्यों न करूँ अय्याशी?”
“मगर यार … मुझे यहाँ तो लोड़ा ही नहीं मिलते?”
“तू बुरचोदी काम्या रहेगी वैसी की वैसी चूतिया हॉट गर्ल … अरे यहाँ तो लोड़ा की बड़ी बड़ी मंडियां हैं। हर तरह के लोड़ा का बाज़ार हैं। चारों तरफ हर गली मोहल्ले में लोड़ा ही लोड़ा घूम रहे हैं. बस उन्हें पकड़ने वाली चाहिए।”
वो आगे बोली- जानती हो … पुणे में बहुत बड़ा समंदर है तो यहाँ लोड़ा का भी बहुत बड़ा समंदर है। और फिर बरसात के मौसम में … अरे यार लोड़ा का असली मज़ा तो बरसात में ही है।
“हायल्ला … तो फिर दिलाओ न मुझे लोड़ा … मैं तो अपने मन के लोड़ा के लिए तरस रही हूँ।”
“ठीक है, तो तू चल मेरे साथ आज मैं तुझे लोड़ा वालों के लोड़ा से मिलवाती हूँ।”
मैंने आँखें फाड़ कर कहा- सच में?
“हां यार सच में, मैं झूठ नहीं बोल रही!”
मैं उसके साथ उसके घर पहुँच गयी।
उसका फ्लैट अच्छा ही नहीं बल्कि बड़ा भी था। वह अकेली ही रहती थी।
उसने मुझे पूरा फ्लैट दिखाया।
मैंने मजाक में कहा- अब तू अपने पेटीकोट के अंदर वाला भी फ्लैट दिखा दे मुझे शबनम?
वह बोली- मैं वह फ्लैट तब दिखाऊंगी जब तू अपना फ्लैट दिखाएगी।
हम दोनों इसी बात पर हंस पड़ी।
वह कुछ इंतज़ाम करने लगी।
मैंने पूछा- क्या कोई आने वाला है यार?
वह बोली- हां, कोई आने वाला है!
मैंने कहा- अरे बिना तेरे बुलाये कोई कैसे आ जायेगा?
वह बोली- अरी मेरी मादरचोद छम्मक छल्लो काम्या … मैंने तो वहीं से उन्हें व्हाट्सप कर दिया था। वो बस आते ही होंगें।
इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया।
मैं समझ गयी कि वही लोग होंगे।
शबनम ने दरवाजा खोला और दोनों लड़कों को अंदर बुला लिया।
उसने दरवाजा बंद कर दिया और वो दोनों सोफा पर बैठ गए।
मैंने तो दोनों को एक नज़र में ही देख कर मस्त हो गयी।
मेरी चूत भी अंदर मस्त होकर कुलबुलाने लगी।
शबनम बोली- देख काम्या यह है मेरा दोस्त रोशन और ये है इसका दोस्त तरुण। ये दोनों मादरचोद बड़े पक्के दोस्त हैं।
फिर वह उन लोगों से बोली- और यह है मेरी फक्कड़ किस्म की सहेली बुरचोदी काम्या। लोड़ा चूसने में इसका कोई जबाब नहीं!
वो दोनों हंस पड़े।
तब तक ड्रिंक्स का सेट लग ही चुका था।
शबनम ने सबको एक एक पैग व्हिस्की पकड़ा दी।
हम सबने चियर्स कहा और सिप करने लगे, साथ ही साथ सिगरेट भी पीने लगे।
मुझे मालूम था कि शबनम सिगरट पीती है और मैं भी पीती हूँ।
शबनम को शरारत सूझी तो उसने सिगरेट का कस लिया, धुआं मुंह में भरा और फिर उसे तरुण के लोड़ा पर फूंक कर निकाल दिया।
मैंने भी धुंआ का कस लिया और दूर से रोशन के लोड़ा पर फूंक कर निकाल दिया।
हमारी मस्ती सबको नज़र आने लगी थी।
तब रोशन ने भी धुंआ मेरी चूचियों पर मारा और तरुण ने शबनम की चूचियों पर!
इशारों इशारों में हमने अपना अपना लोड़ा चुन लिया और उन्होंने अपनी अपनी चूचियाँ!
दूसरे कश में भी सबने उसी निशाने पर धुआं मारा तो बात पक्की हो गयी।
शबनम की सिगरेट ख़त्म हुई तो उसने अपनी बांहें तरुण के गले में डाल दीं और मैंने रोशन के गले में!
रोशन मेरी चूचियाँ ऊपर से ही दबाने लगा और मैं उसका लोड़ा टटोलने लगी।
मर्द का हाथ जब चूचियों पर लगता है तो चूचियाँ अपने आप ही मचल उठतीं हैं।
इसी तरह तरुण ने शबनम को चिपका लिया उसकी चूचियाँ मसलने लगा.
शबनम उसका लौड़ा ऊपर से दबाकर चूम कर अपनी इच्छा ज़ाहिर करने लगी।
अब तक मूड सबका बन गया था कोई भी पीछे हटने वाला नहीं था।
ऐसे माहौल में कपड़े बिलकुल अच्छे नहीं लगते इसलिए उनका उतरना जरूरी था।
पहले शबनम की चूचियाँ खुलीं फिर मेरी भी!
उधर शबनम का पेटीकोट खुला तो इधर मेरा भी पेटीकोट खुल गया।
अब हम दोनों मादरचोद बिलकुल नंगी हो चुकी थीं।
मैंने फटाफट रोशन के कपड़े उतारे और उसका लौड़ा पकड़ कर मुस्कराते हुए हिलाने लगी।
लोड़ा साला तन कर खड़ा हो गया।
मैंने कहा- शबनम लौड़ा तो यार बड़ा मस्त है रोशन का! मज़ा आ गया इसे देख कर!
वह बोली- हां यार इधर देखो … लौड़ा तरुण का भी जबरदस्त है। अब आएगा चुदाई का असली मज़ा!
मैं नंगी नंगी रोशन के जिस्म से चिपक गयी और वह तरुण के जिस्म से!
नंगी नंगी किसी नंगे मर्द से चिपको तो उसका मज़ा कुछ और ही होता है और हम लड़कियां ऐसे मौकों की तलाश में हरदम रहती हैं।
मैं पेल्हड़ थामे हुए रोशन का लोड़ा बड़े प्यार से चूसने लगी और शबनम तरुण का लोड़ा बड़ी मस्ती और बेशरमी से चूसने लगी।
कुछ देर बाद रोशन के जब लोड़ा पेला मेरी चूत में और चोदना शुरू किया तो ज़न्नत का मज़ा आने लगा।
उधर मेरे सामने ही शबनम तरुण का लोड़ा अपनी चूत में पेलवाकर मजे से चुदवाने लगी।
हम दोनों की चूत का बाजा बजने लगा जिसकी आवाज़ बड़ी मनमोहक लगने लगी।
बाहर बड़ी जोर की बरसात हो रही थी और यहाँ अंदर गर्म गर्म जिस्म के साथ गर्म गर्म चुदाई हो रही थी।
उधर से बादलों की गर्जना सुनाई पड़ रही थी और इधर से हम दोनों की चूत से धच्च धच्च, भच्च भच्च, गच्च गच्च की आवाज़ें सुनाईं पड़ रहीं थीं।
बरसात के मौसम में लड़कियों को लोड़ा बड़ा प्यारा लगता है और लड़कों को चूत और चूचियाँ बड़ी प्यारी लगतीं हैं।
इस तरह हमने लिया लोड़ा का भरपूर मज़ा!
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