तमन्ना को डॉगी स्टाइल में, खेतों के बीच चोदा

मेरी सपनो की रानी अब मेरे सामने पूरी नंगी थी; जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था, मुम्में खुले थे, गांड खुली थी, बुर सामने थी। उसके होंठ भी मेरे कब्जे में थे। बस अब को मन था इसे इतना चोदना है कि ये आज ही रंडी बन जाए.. आज मैं इसके ऊपर रहूं..कल से ये लपक के मेरा लोड़ा पकड़ने लगे

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Unknown

3/29/20261 min read

मुझे सैक्स करना बहुत पसंद था.. अगर लड़की ना मिले या पॉर्न ना मिले तो मै आंखें बंद करके सोचते-सोचते ही मुठ मार लेता था.. लेकिन मैं इसे अपनी सोच से बाहर निकलकर सच में करना चाहता था।

एक बार मेरे हाथ यह मौका लग गया।

मैं जिस कोचिंग में पढ़ता था वहां तमन्ना नाम की लड़की ने एडमिशन लिया था।

एकदम गोरी-चिट्टी तमन्ना मुझे पहले ही दिन और पहली ही नजर में पसंद आ गई थी।

मैं उसकी गांड पीछे से देखा करता था।

वह साईकल से कोचिंग आती थी।

अक्सर जीन्स और टॉप पहनने वाली उस लड़की का चेहरा बहूत हँसमुख था।

मैं रोज सोचता कि आज इसने कौन से रंग की पैंटी पहनी होगी।

उसकी जीन्स के ऊपर मैं उसकी पैंटी को इमेजिन करता।

मुझे उसके रसीले होठ इतने प्यारे लगते कि मन करता था कि किसी तरह उसे छू लूं।

तमन्ना बहुत एकांत में रहती थी।

बहुत किसी से बात नहीं करती थी।

उस दिन ऐसा हुआ कि कोचिंग खत्म होते होते काफी देर हो गई।

अंधेरा हो गया।

सर्दियों के दिन … ऊपर से यह बारिश जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

7 बजे सब लोग क्लास खत्म होने के बाद अपने अपने घर जाने लगे।

मैं रोज की तरह उस दिन भी तमन्ना की गांड देखने के लिए क्लास में ही रुका रहा।

फिर वह आई।

उसने उस दिन एक मैरून रंग का स्वेटर पहन रखा था। उसके ऊपर ग्रे कलर की टोपी लगा रखी थी।

गुलाबी जूते और कसी हुई जीन्स में वह रोज की तरह मस्त माल दिख रही थी।

क्लासरूम से निकलते हुए मैं पहले तो उसके उभरे हुए सीने पर देखता रहा और सोचता रहा कि इसके मुम्में कितने बड़े होंगे। और जब मैं अपना लोड़ा इन चूचियों पर मारूंगा तो कितना मजा आएगा..

उस लड़की को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि इतने कपड़े पहनने के बाद भी किसी अनजान लड़के की नज़र में वह नंगी है; उसे उसके मुम्में दिख रहे हैं; उसके कत्थई निप्पल, उसकी झांटों वाली चूत जो थोड़ी काली सी भी है।

उसकी गांड का छोड़ा सा छेद जिसमें एक उंगली भी नहीं जा रही है। उसका गोरा कोमल जिस्म, जिस पर एक गुलाबी जीभ घिसट रही है।

मैं ये सब सोच रहा था कि वह मेरे सामने से गुजरी।

उसका पूरा पिछवाड़ा मेरे सामने था।

ऊपर स्वेटर और स्वेटर के नीचे कसी हुई जीन्स से झलकती उसकी बड़ी सी गांड … मैं उसके चूतड़ों को हिलते हुए देखता रहा।

जैसे जैसे वह चलती, उसकी गांड हिलने लगती।

मेरा मन किया कि अभी अपना लोड़ा खोलूँ और जाकर उसकी जीन्स उतारकर उसकी चूत में पीछे से घुसा दूं और घंटों उसे पेलता रहूं।

लेकिन मैंने अपने आपको रोका और उसके पीछे पीछे चल दिया।

कुछ दूर जाते ही रुकी हुई बारिश फिर शुरु हो गई। हम अपनी साईकल लेकर पास के एक छप्पर की ओर भागे।

हम जिस रास्ते से जाते थे, वहां रास्ते में तकरीबन 2 किलोमीटर तक खेत वाला एरिया था।

ऐसे ही एक खेत में एक छप्पर लगा था।

मैं उसके नीचे जाकर खड़ा हो गया, और बारिश रुकने का इंतज़ार करने लगा।

अचानक मैंने देखा कि कोई और भी उसी रास्ते पर चला आ रहा है।

जब साईकल नजदीक आयी तो मैं चौंक गया।

मेरी धड़कन बढ़ गई और सांसें तेज़ हो गईं।

यह तमन्ना थी।

वह छप्पर में रुकना चाहती थी।

लेकिन मुझे देख ठिठक गई।

वह जाने लगी तो मैंने ही आवाज़ देकर रोक लिया।

तो वह धीरे धीरे आगे बढ़ी और छप्पर के एक कोने में साईकल खड़ी कर बारिश रुकने का इंतज़ार करने लगी।

मैं जो रोज़ उसकी गांड निहारा करता था, उसे पेलने के सपने देखता था, लेकिन उस वक़्त उससे नजर नहीं मिला पा रहा था।

मेरे अंदर अजीब सी बेचैनी होने लगी थी।

पता नहीं क्यों अचानक से लोड़ा टाइट होने लगा।

मुझे बार बार मन कर रहा था कि तमन्ना को पकड़कर नंगा कर दूं … उसकी पैंटी मुंह में भर लूं और ब्रा को सूंघने लगूं जिसमें उसके जिस्म की खुशबू है।

बहुत मुश्किल से मैंने खुद पर काबू पाया।

मन ही मन सोचा कि आज घर जाकर मुठ ज़रूर मारूंगा।

मैं इन सब ख्यालों में था कि अचानक मैंने आवाज़ सुनी- आप रोज इधर से ही जाते हैं?

तमन्ना से मैं बात करना चाहता था लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह इतना आसान होगा।

वह खुद पहल कर रही थी।

मैंने तुरन्त जबाब दिया- हां।

उसने बताया कि अक्सर वह पक्की रोड वाला रास्ता लेती थी लेकिन आज उसने जल्दी जल्दी में ये वाला रास्ता ले लिया। फिर भी बारिश से नहीं बच पाई।

बात शुरू हुई तो हम लोग काफी देर तक बात करते रहे।

मैं बीच बीच में उसके उभार और चूत की ओर भी नज़र मार लेता था। उसके चेहरे पर सिर्फ उसके होठों को देखता था,मेरा मन करता उसके मुंह में जीभ डालकर चाट लूं।

कुछ देर बाद बारिश बन्द हो गई और हमारी दोस्ती शुरू हो गई।

हम रोज उसी रास्ते जाने लगे।

जब हम दोस्त हुए तब हमको पहली बार पता चला कि क्लास में अक्सर चुप रहने वाले हम दोनों लोग खूब बोलते हैं।

हम व्ट्सऐप पर भी खूब चैटिंग करने लगे।

मेरा तो उसे पेलने का पहले से ही इरादा था।

हालांकि मैं सिर्फ एक बार उसके जिस्म का मज़ा लेना चाहता था। उससे प्यार मुझे अब तक नहीं हुआ था।

बस मुझे वह 19 साल की गोरी लड़की अपनी बड़ी सी गांड और मोटे होंठ के लिए पसंद थी।

उसके मुम्में के क्लीवेज कई बार मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर देते थे।

उसे मैं कैसे लगता था, इस बारे में मुझे नहीं पता था।

एक दिन तमन्ना ने मुझे घर जाते वक्त रास्ते में ही प्रपोज कर दिया।

मैं चौंक गया। मैं सोचने लगा कि तमन्ना को चोदने का रास्ता क्या इतना आसान था।

मैंने हां-ना कुछ नहीं कहा … बस उसी छप्पर के नीचे चला गया, साईकल खड़ी की और वहीं बैठ गया।

तमन्ना को कुछ जवाब नहीं मिला था तो वह भी पीछे पीछे आयी और साथ बैठ गई।

अपने बगल मैं उसको महसूस करके बहुत रोमांचित हो गया।

मैं सोचने लगा कि इतनी सुनसान जगह में सिर्फ हम दो ही लोग हैं। मैं और मेरे साथ एक जवान लड़की है, जो खूबसूरत और सेक्सी है. लड़के जिसे सोच सोचकर अपना पानी निकालते हैं। कितने तो उसे पेलने का सपना देखते हैं।

अब मैं औऱ ज्यादा उत्तेजित हो गया और मेरा लोड़ा खड़ा होने लगा।

हम दोनों कुछ देर चुप रहे।

फिर मैंने अचानक से फैसला किया कि आज मैं तमन्ना को पेलूँगा, मज़ा आया तो उसका प्रपोजल मान लूंगा नहीं तो नहीं!

मैंने धीरे से उसके कंधे पर अपना सिर रख दिया।

उसने भी विरोध नहीं किया।

मैं उसे सूंघने की कोशिश कर रहा था और सोच रहा था कि उसके गदराए स्तनों से बहुत कम दूरी पर हूँ।

उन्हें मैं अपने मुंह में लेना चाहता था लेकिन सब एक झटके में करने से मामला बिगड़ सकता था।

इसलिए मैंने पहले उसकी गर्दन को अपनी नाक से और फिर होंठ से सहलाना शुरू किया, बाल हटाए और नंगी गोरी गर्दन पर होंठ फिराने लगा।

इतनी कोमल और गर्म त्वचा की बस मज़ा आ गया।

वह थोड़ी सी असहज होने लगी थी।

मैंने सोचा कि अब जब शुरुआत कर ही दी है तो अंजाम भी आज ही देख लेंगे। मैंने बिना देर किए अपने होंठ उसके होठों पर रख दिये।

वह चौंक गई और अपना चेहरा हटा लिया।

मैं संकोच में पड़ गया कि उसे बुरा तो नहीं लगा।

मेरी किस्मत अच्छी थी कि उसे बुरा नहीं लगा था क्योंकि अबकी बार उसने खुद मेरा सिर हाथ में लेकर मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिये थे।

हम लोग एक दूसरे के होठों को पहले अपने अपने होंठों से सहलाते रहे

मैं उसके होठों का पूरा स्वाद लेना चाहता था।

मैंने अपनी जीभ उसके मुंह के अंदर डाल दिया, उसकी जीभ पर फिराने लगा, उसकी थूक को चाटने लगा।

अब वह जमीन पर हो गई थी और मैं उसके ऊपर आ गया था।

काफी देर तक हम एक दूसरे का होठ अपने मुंह में लिए रहे।

मैं तो उसे चोदने के मूड में था ही, वह खुद चुदवाने के लिए जैसे बेचैन होने लगी थी।

वह मेरी पीठ पर अपना हाथ फेर रही थी।

मैंने उसका एक हाथ उठाया और अपनी पैंट में डाल दिया।

लोड़ा पर मुलायम हाथ पड़ते ही मैं तो सुन्न हो गया, लगा कि अभी झड़ जाऊंगा।

उसने भी लोड़ा छूते ही हाथ पीछे खींच लिया।

शायद पहली बार वह लोड़ा को हाथ लगा रही थी।

मैंने कुछ नहीं कहा।

उसके गोरे बदन पर मैं पूरा लेट गया था। उसकी गर्दन और आसपास के खुले अंगों को चाट रहा था।

मुझे उसके मुम्में अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे; अपने दोनों हाथों से उसके मुम्में पकड़ लिए।

गनीमत यह थी कि आज ठंड कम थी और अच्छी खासी धूप थी।

मैंने उसका स्वेटर निकल दिया।

उसके नीचे वह पीले रंग का टॉप पहनकर आई थी जो उस पर काफी खिल रहा था।

टॉप से उसके स्तन और उभरकर दिख रहे थे। टॉप शायद छोटा ही था उसे!

ऊपर से ही स्तन पकड़कर मैं दबाने लगा।

कुछ देर बाद मैंने इसका टॉप उतार दिया।

यह बड़ी पहल थी फिर भी उसने विरोध नहीं किया।

मैं समझ गया, आग उधर भी उतनी ही लगी है।

अब मैं सब कुछ खुलकर करना चाहता था।

टॉप निकालने के बाद मुझे अंदर सिर्फ उसके नंगे, उजले और कोमल मुम्में ही मिले।

वह ब्रा पहनकर नहीं आई थी।

मैं भी इसका कारण पूछे बिना ही मुम्में को हाथों में लेकर मसलने लगा।

जमीन पर लेटी उसने आंखें बंद कर ली थीं। वो पक्का चुदने ही आई थी.. उसका इरादा ही ये था..

मैं उसके करीब गया और उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लिया; उसके निपल्स और मुम्में को काफी देर तक चूसता रहा।

ऐसा लगता कि अभी दूध निकल आएगा।

फिर मैं धीरे धीरे नीचे बढ़ने लगा, नंगे पेट पर जीभ फिराने लगा, नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा।

चाटते चाटते और नीचे पहुंचा और पैंट के ऊपर से ही उसकी चूत चाटने लगा।

नाक लगाकर सूंघने की कोशिश की कि तमन्ना की पेशाब की गंध आ जाए।

पेशाब की गंध तो नहीं मिली लेकिन उसकी ठंडी आहें निकलनी शुरू हो गई थीं।

उसके भरे पूरे सफेद चेहरे पर यौन उत्तेजना थी। जैसे वह चाहती हो कि उसकी बुर को कपड़ों से आज़ाद कर दूं।

कुछ देर बाद मैंने वही किया, जीन्स उतार दिया।

नीचे लाल रंग की चड्डी थी, जाली वाली.. गोरे अंग पर बहुत खिल रही थी।

चड्डी के ऊपर से ही मैंने चूत को महसूस करने की कोशिश की।

मैं पहली बार असली चूत देखने वाला था। मेरे रोमांच का ठिकाना नहीं था।

मेरी बहुत ख्वाहिश थी कि कभी तमन्ना का पेशाब पियूँ।

आज मौका था।

मैंने उसकी चड्डी के ऊपर से ही चूत चाटना शुरू कर दिया।

चड्डी के आसपास के नंगे अंगों पर भी जीभ फिराने लगा।

कोई स्वाद तो नहीं था लेकिन इससे ज्यादा टेस्टी चीज मैंने आजतक नहीं चाटी थी।

अलग जगह उसका टेस्ट महसूस हो रहा था।

मैंने उसकी गोरी टांग पूरी चाट डाली।

वह आंखें बंद किये जोर जोर सांस लेती रही।

अब बारी थी कि उस चीज को सामने लाया जाए जिसके लिए कई कई लड़के मरते हैं।

मैंने भी जिसके बारे में सिर्फ कल्पना ही की है।

चड्डी हटाते ही काले बालों से घिरी कत्थई फांकों वाली जवान चूत मेरे सामने थी।

पहले तो मुझे समझ नहीं आया कि क्या क्या करूं।

लगा कि इसे मुंह में भर लूं, अपने होठों और जीभ से चाट डालूं, उसमें अपनी उंगलियां डालकर खूब पेलूँ।

झांट के बाल तक खा जाने का मन कर रहा था।

मेरी सपनो की रानी अब मेरे सामने पूरी नंगी थी; जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था, मुम्में खुले थे, गांड खुली थी, बुर सामने थी।

उसके होंठ भी मेरे कब्जे में थे। बस अब को मन था इसे इतना चोदना है कि ये आज ही रंडी बन जाए.. आज मैं इसके ऊपर रहूं..कल से ये लपक के मेरा लोड़ा पकड़ने लगे

मैंने अपने आपको स्थिर किया और धीरे से उसकी चूत में एक उंगली डालने की कोशिश की।

तमन्ना तड़प गई।

मुझे लगा कि यह पहली बार है, इसलिए आराम आराम से करना चाहिए।

मैंने उंगली को थूक से गीला किया और धीरे धीरे बूर में अंदर बाहर करने लगा।

तमन्ना को अच्छा लग रहा था; वह आह आह करने लगी।

मेरा लोड़ा तन गया था।

मैंने देर न करते हुए अपने सब कपड़े उतार दिए और नंगा ही तमन्ना के नंगे बदन पर लेट गया।

बहुत देर तक हम एकदूसरे से लिपटे रहे, एक दूसरे की देह को रगड़ते रहे, जगह जगह चूमते चाटते रहे।

अब बारी थी मेरे लोड़ा के तमन्ना के होठों से स्पर्श की!

मैंने जैसे ही अपना लोड़ा उसके मुंह में डाला उसने अजीब सा चेहरा बना लिया।

फिर थोड़ी देर बाद उसे मज़ा आने लगा।

उसने लोड़ा का कवर खोल दिया और उस पर जीभ फिराने लगी।

लोड़ा सहलाने में मुझे इतना मज़ा कभी नहीं आया था।

बहुत देर तक वह लोड़ा चूसती रही। बिल्कुल ऐसे जैसे प्रोफेसनल लड़कियां ब्लू फिल्म में करती थीं.. वो कुंवारी चूत अब मेरे हाथों में.. चुदने के लिए तैयार रखी थी..

अब बारी थी तमन्ना पर लंड प्रहार करने की..मुझे मिशनरी पोजीशन बहुत पसंद है।

मैंने उसे इसी पोजीशन में चोदने का फैसला किया। मैंने अपना लोड़ा उसकी चूत के लबों पर फिराया।

वह जोर जोर से सांस ले रही थी।

मैं उसको अपने सामने नंगी देखकर विश्वास नहीं कर पा रहा था कि यह वही सेक्सी तमन्ना है जिसको मैं अरसे से चोदना चाहता था।

अब वह समय नज़दीक आ गया था।

हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए।

खूब जोर से धक्का देते हुए मैंने अपना टाइट लोड़ा उसकी कोमल चूत गुफा में डाल दिया।

वह चीख पड़ी। बहुत जोर से चीखी.. उसके प्राण निकल गए थे कसम से

उसकी सील टूटी थी लेकिन लोड़ा वहां पहली बार लैंड कर रहा था।

मैं थोड़ा धीरे हो गया।

वह चिल्लाती इससे पहले उसके होंठ अपने मुंह में भर लिया।

फिर धीरे धीरे चूत में लोड़ा को अंदर बाहर करने लगा।

अब उसे मज़ा आने लगा था।मैं तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रहा था।

कितनी मुलायम होती है यार ये चूत … कितनी गर्म भी!

लोड़ा अंदर जाता तो लगता जैसे उसकी बुर की दीवारें मेरे लोड़ा का गला घोंट देंगी।

चारों ओर से बुर के अंदर का मुलायम मांस लोड़ा को जकड़ लेता।

मुझे लगता, अब पानी निकलेगा, तब पानी निकलेगा।

इतना मज़ा मुझे आ रहा था कि मैं सोच रहा था, मेरा पानी निकले ही न और मैं तमन्ना को ऐसे ही चोदता रहूं।

उसका पूरा जिस्म मेरी नंगी बॉडी को टच कर रहा था।

अब तो वह भी एक्टिव हो गई थी और धक्के मारने लगी थी।

मैंने पोजीशन चेंज करने की सोची।

मैं लेट गया और तमन्ना को मेरे लोड़ा पर बैठने को कहा।

उसने ऐसा ही किया।

अब वह मेरे सामने थी … आंखें बंद किये।

उसके मुम्में उसकी छाती पर झूल रहे थे; मैंने उन्हें हाथों में थाम लिया और मसलने लगा। मस्त मजा आ रहा था आराम से लेटा हुआ मैं.. मेरे ऊपर मेरे सपनों की रंडी

उसकी उछलने वाली मुद्रा और हाथ में वो दो चमत्कारी लड्डू..

उसने आंखें खोल दीं और मेरी ओर देखने लगी।

लोड़ा अंदर जाता तो उसे थोड़ा दर्द होता और वह आह बोल उठती।

लेकिन मज़ा उसे भी बहुत आ रहा था।

थोड़ी देर बाद तमन्ना मेरे बदन पर लेट गई।

मैंने उसे बांहों में लिया और जमीन पर लिटा दिया।

सामने से आकर मैंने उसकी गोरी टांगों को पहले तो चाटा फिर उसे फैला दिया। सामने एक मुलायम झांटों से भरी चूत थी।

मैंने लोड़ा को चूत के छेद में डाल दिया और झटके से इसे अंदर धकेल दिया।

इसी पोजीशन में काफी देर तक मैं उसे झटके पर झटके देता पेलता रहा।

मैंने तमन्ना को तीन बार चोदा लेकिन एक बार और पेलने की हसरत नहीं जाती।

जब शाम होने लगी तब जाकर तमन्ना ने बस कहा।

मेरा मन तो नहीं मान रहा था लेकिन तमन्ना की बात मानकर मैंने उसकी चूत में आखिरी बार पानी निकाला और लोड़ा बाहर कर लिया।

कुछ देर तक हम दोनों एक दूसरे को नंगे बदन सिर्फ देखते रहे।

फिर अचानक मैंने उसकी आँखों में एक सवाल देखा।

मैं उठा और अपने बैग से एक मार्कर निकाला।

उसकी झांटों को किनारे किया और बुर की बगल में ही लिखा ‘I LOVE YOU TOO.’

यही चीज़ उसके दोनों स्तनों पर लिखा और उठकर कपड़े पहन लिए।

वह मेरे लिखे को काफी देर देखती रही और मन ही मन खुश होती रही।

मैंने उसे उठाया।

पहली बार चुदाई की वजह से उसे चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन वह खुश थी।

मैं भी बहुत खुश था।

उसने अपने कपड़े उठाए और टॉप पहनने लगी।

उसकी चड्डी मैंने अपने पास रख ली।

बिना चड्डी के जब वह जीन्स पहन रही थी तब मैंने एक बार और उसकी चूत को अपने पूरे मुंह में भर लिया और जोर से चूस लिया।

फिर उसने जीन्स पहन ली और चैन बन्द कर ली।

हम लोग गले मिले, मैंने उसके स्तन दबाए औऱ फिर अपने अपने रास्ते चल दिये।

यह चुदाई मेरी ज़िन्दगी की सबसे यादगार चुदाइयों में से एक है।

(यह कहानी काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।)