दोस्त की गर्मागर्म बीवी को पटक के चोदा

एक शादी में मेरा दोस्त अपनी सेक्सी बीवी को लेकर आया हुआ था. रात को भाभी जगह की कमी के कारण मेरी बगल में लेट गयी. फिर जो मैंने उन्हें चोदा है..

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10/31/20261 min read

दो साल पहले मैं एक शादी में सूरत गया था.

मेरे पिताजी मां और बहन एक और शादी के लिए सूरत गए थे और इसलिए मैं इधर अकेला आया था.

मैं यहां अपने दोस्त और उसकी पत्नी जालपा से शादी में मिला.

जालपा एक सेक्सी लड़की थी और हम सारे दोस्त लोग आपस में हमेशा इस बारे में बात करते थे कि यह हॉट लड़की इस सीधे सरल मुकेश को कैसे मिल गई.

रात हो गई और मैं सोने के लिए जगह ढूँढने लगा, सारा घर लड़के-लड़कियों से भरा हुआ था.

मैंने एक बिस्तर पर जगह देखी और अपने लिए तकिया लाकर उस पर रखा और लेट गया.

मैं अपने लैपटॉप से ईयरफोन कनेक्ट किए और कानों में लगा कर लेट गया.

बगल में हंगामा हो रहा था.

मैंने देखा कि इंडियन हॉट जालपा भाभी वहां थी और वह खुद के लेटने के लिए दरी बिछा रही थी.

मैंने पूछा- यहां नीचे क्यों? तुम्हारे पतिदेव किधर हैं?

जालपा भाभी ने हंस कर कहा- मौसी ने पति-पत्नी को अलग-अलग सोने को कहा है. मैं यहीं तुम्हारे पास सोऊंगी.

रात के करीब 2 बजे होंगे और सभी लोग गरबा खेलने से थक गए थे इसलिए गहरी नींद में सो गए.

मेरी आंखों से नींद कोसों दूर थी.

तभी किसी ने कमरे की लाइट बंद कर दी.

मेरी आंखों के सामने भी अंधेरा छाने लगा.

वहीं मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कोई कीड़ा मेरे ऊपर चल रहा है.

मैंने टटोलने के लिए हाथ से उस जगह को छुआ तो किसी का हाथ महसूस हुआ.

तभी मेरे हाथ को किसी ने उठाया और अपने मम्मों पर रख दिया.

मैंने आंख खोल कर देखा तो पाया कि यह तो जालपा भाभी थी!.

मैंने यह सोच कर उसका हाथ हटा दिया कि शायद मैं गलती से हो गया.

कुछ देर बाद मेरा हाथ फिर से उठा लिया गया था और मेरा हाथ उसके मम्मों पर था और उसका हाथ मेरी जांघों के जोड़ पर लोड़ा तक पहुंच गया था.

मैंने जालपा भाभी का हाथ पकड़ लिया.

उस हॉट भाभी ने आंखें खोलीं और मेरी तरफ देखा.

मैंने कहा- क्या हुआ?

जालपा भाभी ने कहा- कुछ नहीं!

मैंने कहा- फिर तुम्हारा हाथ?

जालपा भाभी बोली- अनिल ने मुझे कभी अपना सामान छूने ही नहीं दिया.

मैं हैरान था.

उसने आगे कहा- मैं अपने पति से कभी संतुष्ट नहीं हो पाई. वे खुद को दूसरों मर्दों के गुप्तांगों के आदी कहते हैं और अपने लोड़ा को छूने भी नहीं देते. तुम मुझे बताओ अनिल, मुझे अब घुटन महसूस हो रही है. मुझे दो दिन तक यहीं तुम्हारे साथ मौज-मस्ती करने दो.

मैंने कहा- यहां कोई देख लेगा.

जालपा भाभी बोली- कल पब्लिक कम होगी क्योंकि दोपहर में शादी है इसलिए दुकान के स्टोर में मिलते हैं.

मैंने ओके कहते हुए उसके दूध को पकड़ कर मसल दिया.

वह आह करती हुई मेरे पलंग पर आ गई.

मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और होंठों पर अपने होंठ टिका दिए.

वह भी मुझे चूमने लगी और मेरे सीने से अपने दूध रगड़ने लगी.

मैंने उसके एक दूध को पकड़ कर मसला, तो वह वासना से बोली- पियोगे नहीं?

मैंने उसके ब्लाउज को खोल दिया और ब्रा को ऊपर उठा कर उसका एक दूध चूसने लगा.

वह मेरे बालों में हाथ फेरती हुई मुझे दूध पिलाने लगी.

मैं उसके एक दूध को चूस रहा था और दूसरे को मसल रहा था.

कुछ ही देर में मैं चुदास से भर गया और मैंने जालपा के कान में कहा- अभी ही चोद दूँ!

वह बोली- इधर शोर होगा.

मैंने कहा- शोर नहीं करना तो मजा अभी ले लेते हैं!

वह बोली- मेरी बहुत ज्यादा टाइट है. तुम्हारा घुसेगा तो दर्द तो पक्का होगा.

यह कहते हुए उसने मेरे लौड़े को पकड़ लिया.

मैंने कुछ नहीं कहा और बस उसे चूमता चूसता रहा.

फिर मैंने उससे कहा- मेरा लोड़ा चूस दो!

वह राजी हो गई और 69 में हो गई.

मैंने उसकी बुर को जीभ से चाटना चालू कर दिया और वह मेरे लोड़ा को मुँह में लेकर चूसने लगी.

मुझे उससे लोड़ा चुसवाने में बेहद मजा आ रहा था और कुछ देर बाद भाभी की बुर ने पानी छोड़ दिया.

मैंने उसकी बुर का रस चाट कर बुर को साड़ी से पौंछ कर साफ कर दिया.

कुछ देर बाद मैं भी जालपा भाभी के मुँह में ही झड़ गया.

उसने मेरे लौड़े की मलाई खा ली और लोड़ा को चूस चाट कर साफ कर दिया.

उस दिन हम दोनों ने एक दूसरे के जिस्म का मजा लिया और झड़ कर सो गए.

मैं अगले दिन का बहुत बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था क्योंकि जालपा भाभी सुबह से ही मुझे संकेत दे रही थी और चिढ़ा रही थी.

मेरी सुबह की चाय और शाम का नाश्ता भी वही लाई थी.

आख़िर रात आ ही गई.

मैं कल वाले कमरे में ही रुक गया और कुछ मिनट बाद भाभी भी आ गई.

सबके सो जाने के बाद भाभी ने मेरे कान में कहा- तुम आगे बढ़ो … मैं आ रही हूँ.

मैं उठा और इधर-उधर देखता हुआ दुकान के स्टोर में चला गया.

वहां गेहूं के बोरे लगे हुए थे और बगल में एक प्लास्टिक की चटाई भी पड़ी थी.

चार पांच मिनट बाद मेरी हॉट भाभी भी आ गयी.

फ्रेंड वाइफ आते ही वह मुझसे लिपट गई और मेरे होंठों को अपने होंठों से चूमने लगी.

मेरा लोड़ा एकदम सख्त हो गया और मैंने अपना ट्रैक पैंट भी गीला करना शुरू कर दिया.

भाभी मुझसे चिपकी रही और एक हाथ से अपने कपड़े उतारने लगी.

मैंने मोबाईल की रोशनी में देखा कि मेरी सेक्सी भाभी का ब्लाउज खुलते ही उसके सेक्सी स्तन मस्त लाल ब्रा में दिखने लगे.

मेरा हाथ तुरंत भाभी के स्तनों पर पहुंच गया और मैं एक दूध दबाने लगा.

मेरा लोड़ा बहुत सख्त हो गया था.

भाभी ने धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसका हॉट बदन अंधेरे में मचलने लगा.

मैंने धीरे-धीरे जालपा भाभी की बुर पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया और वह ‘उह आह ओह, अनिल चलो … मैं बहुत उत्तेजित हूं! कहने लगी.

मेरे कपड़े उतारने के बाद भाभी अब मेरे लोड़ा को अच्छी तरह से मसाज देने लगी.

लोड़ा पूरी तरह से पंख पसारे हुए मोर की तरह नाच रहा था और अब उसे भी बुर के दरवाजे में घुसने की इच्छा महसूस हो रही थी.

मैंने भाभी को वहीं गेहूं के बोरे पर बैठा दिया और उसकी टांगें फैला दीं.

अंधेरे में मुझे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए भाभी ने मेरा लोड़ा पकड़ लिया.

मैंने अपनी हथेली में थोड़ा थूक लिया और अपने लोड़ा के सिरे पर लगाया.

भाभी ने लोड़ा को अपने छेद पर रख लिया और वह हाथ से लौड़े को बुर के छेद पर रगड़वाने लगी.

जालपा भाभी की बुर बहुत चिकनी थी मेरा लौड़ा तुरंत घुसने को उतावला हो गया.

मैंने धीरे से एक झटका दिया और मेरा लोड़ा धीरे से भाभी की हॉट बुर की गहराई को नापने लगा.

भाभी ने हल्की सी चीख निकाली और मैं डर से कांप उठा कि कहीं कोई सुन न ले.

मैंने जालपा भाभी से कहा- बहनचोद चुप हो जा … वरना किसी ने सुन लिया तो गांड में लठ लगेंगे!

शायद शादी की थकान हम दोनों को छोड़कर बाकी सभी के ऊपर चढ़ी हुई थी, तो किसी पर आवाज का कोई असर ही नहीं हुआ.

भाभी मुझे अपने होंठों से चिपका लिया और वह मीठा चुम्बन देने लगी.

मैंने थोड़ी तीव्रता से अपना लोड़ा बुर के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया.

जालपा भाभी मुझे चुम्बन पर चुम्बन दे रही थी और ओह आह भी कर रही थी.

उसकी इस तरह की आवाजें करने से मुझे और भी जोश आने लगा था.

मैं उसे और भी जोर से चोदने लगा.

रात के शांत माहौल में बुर और लोड़ा का संगीत मानो मस्ती से बज रहा था और फच फच की आवाज गूंजने लगी थी.

जालपा भाभी अपनी गांड आगे-पीछे कर रही थी और लोड़ा का और भी ज्यादा मजा ले रही थी.

मुझे लगभग दस मिनट तक भाभी की बुर में लोड़ा अन्दर-बाहर होते हुए होंगे कि तभी भाभी के जिस्म की अकड़न मुझे समझ आने लगी.

वह गर्मी का मौसम था और स्टोर रूम में लाइट भी नहीं थी.

ऊपर से ये कसरती चुदाई के चलते हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे.

हम दोनों की सांसें अब तेज़ हो गई थीं और मैं भाभी को कमर से पकड़ कर दे दनादन चोद रहा था.

उस वक्त भाभी की बुर के अन्दर आखिरी धक्कों का दौर चल रहा था.

भाभी झड़ चुकी थी और वह मेरे बालों में अपना हाथ फिरा रही थी.

वह बीच-बीच में मेरा सिर उठा कर चुम्बन भी दे रही थी.

वह भी इस जबरदस्त चुदाई के हर पल का आनन्द ले रही थी.

मेरा लोड़ा अब चरम अवस्था पर आ गया था.

मैंने भाभी से वीर्य अन्दर लेने के लिए कहा, तो भाभी ने मना करते हुए नहीं कह दिया.

वह बोली- मेरा पति मुझे छू ही नहीं रहा है .. यदि वीर्य ने फसल खड़ी कर दी तो समस्या हो जाएगी.

यह कहते हुए उसने धीरे से लोड़ा को बुर से बाहर निकाल लिया.

वह मेरे लोड़ा के सामने बैठ गयी और उसे अपने दोनों बड़े स्तनों के बीच में लेकर हिलाने लगी.

लोड़ा के उत्तेजित होने पर एक मिनट के अन्दर ही इंडियन हॉट भाभी के खूबसूरत स्तन वीर्य से भर गए.

भाभी ने वहीं पड़े एक कागज से अपने स्तन साफ़ किए और हम दोनों एक एक करके वापस अपने अपने बिस्तर पर आकर ऐसे सो गए, जैसे कुछ हुआ ही न हो

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