मकान मालकिन को बाथरुम में चोदा

अंटी बोली- पहले मुझे नहाकर फ्रेश हो जाने दो. फिर जितना मन करे … उतना कर लेना.इधर मेरा लोड़ा फटा जा रहा था, मैंने कहा- चल हुमा … आज तेरी गांड खोल कर मारूँगा. इस गांड का गौशाला नहीं बना दिया तो मैं एक लंड की औलाद नहीं

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4/13/20261 min read

दोस्तो, मेरा नाम अनमोल है. पुणे (महाराष्ट्र) से हूँ.

कोरोना की वजह से लॉक डाउन लगा तो मेरी जिंदगी में बहुत कुछ बदलाव आ गया.इसी कारण मैंने और मेरे लोड़े ने कई चुत के स्वाद चखे. कई बच्चों के कंडोम में पैक करके फेंक दिया.. कितनी सारी नई नवेली सील तोड़ीं और एक बार तो एक अंटी चोद डाली जिनका कुसूर सिर्फ इतना था कि उन्होनें मुझे मुठ मारते देख लिया था.. मैं hindisexxxkahani.com की hindi sex story में आगे बढ़ने से पहले मेरे लंड और मेरे बारे में बता दूं..

मेरी हाईट 5’7 है … लोड़े की लंबाई साढ़े सात इंच. मोटाई 2.7 के लगभग है. मैं इतना बोल सकता हूँ कि चुत की चुदाई और खुदाई के लिए मेरा लौड़ा एकदम मस्त है. नहीं उससे भी कहीं ज्यादा है..

कोविड की वजह से मेरी कंपनी में से कई लोगों को निकाल दिया गया था. जो बचे हुए थे उनमें से कई लोगों का ट्रांसफर कर दिया गया था.कुछ महिने बाद अचानक से मेरा ट्रांसफर लैटर भी आ गया.मेरे मैनेजर ने मुझे लैटर थमा दिया.एक पल के लिए तो मुझे लगा कि मैं ये जॉब छोड़ दूँ.पर घर की परिस्थितियों को देखते हुए मुझे मजबूरन महाराष्ट्र के जलगांव जाने की तैयारी करनी पड़ी.चूँकि मैं घर से बाहर आज तक नहीं रहा इसलिए ये सब मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था और काफी उदास भी था.

जलगांव जाने वाली बस रात 12 बजे चली और सुबह 8 बजे के करीब मैं जलगांव आ पहुंचा.office formality पूरी की और आफिस के चौकीदार की सहायता से एक रूम देखने निकल पड़ा.सुबह से शाम तक कई रूम देखे और मकान मालिकों के नम्बर भी लिए. मेरे आफिस के सबसे पास एक खान अंकल का रूम था तो उसी कमरे को मैंने फिक्स किया और उन्हें फोन से ही एडवांस दे दिया.

अगले दिन जब मैं उनके घर के रूम पर आ गया तो अंकल ने मुझे चाभी दे दी.मैं बाजार से कुछ जरूरी सामान जैसे गद्दा चटाई खरीद लाया. कमरा सैट किया और उस दिन मैं जल्दी ही अपने ऑफिस चला गया.वापस शाम को 5 बजे जब मैं अपने रूम पर आया तो फ्रेश होकर छत पर आ गया.मैं होंठों में सिगरेट दबाए और कानों में हेड फोन लगा कर गाना सुन रहा था.उसी वक्त एक औरत छत पर आई.शायद वो मेरी मकान मालकिन थीं.

उन्होंने मुझे देख कर हल्की सी स्माइल पास की.मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.अंटी की मैक्सी उनकी बॉडी से पूरी चिपकी हुई थी.क्या गांड थी बहन की लोड़ी की … और अंटी इतनी गोरी एकदम मक्खन की तरह.मुझे लग रहा था कि अभी के अभी खा जाऊं इसकी चूत को.वो भरे बदन की माल अंटी थी.छत पर उन्होंने गेहूँ सुखाने के लिए डाला हुआ था, तो उसी को समेटने के लिए अंटी छत पर आई थीं.

गेहूँ समेटते समय मैंने अंटी के पूरे बदन की साइज नाप ली.

चिपका हुआ गाउन था तो अंटी के जिस्म का एक एक कटाव साफ़ नुमायां हो रहा था और मेरे लोड़ा में आग सी लग रही थी.उन्हें देखते हुए और सिगरेट फूंकते हुए मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरा हाथ पैंट के ऊपर से ही मेरे लोड़ा को सहलाने लगा.उनके दोनों चूतड़ों के बीच की दरार और चूचों को हिलता देखकर मैं सब सुध-बुध खो बैठा था.अचानक से अंटी की नजर गेहूं समेटने के दौरान मेरे ऊपर पड़ी.

अंटी ने मुझे घूर कर देखा और काफी गुस्से से अपना काम जल्दी जल्दी करके वहां से चली गईं.पहला दिन था और मेरी छवि जिस तरह की बन गई थी, उससे तो मेरी गांड ही फट गई कि अंटी अपने शौहर को बोल कर मेरी शिकायत करेगी.फिर मैंने सोचा कि मां चुदाए … साली को देखा तो देखा … अब अंकल भगाएगा तो दूसरा कमरा देख लूंगा.ये सब सोच कर मैं भी चुपचाप रूम में चला गया.दो दिन तक तो मैं फटी गांड लिए रहता रहा.मुझे बार बार लग रहा था कि कहीं कुछ लफड़ा हो गया तो मेरे लौड़े लग जाएंगे.

फिर धीरे धीरे सामान्य हो गया.मेरा रूटीन भी सैट हो गया.

रोज की तरह सुबह जाओ, अपना ऑफिस वर्क करो और शाम को कमरे पर आ जाओ.लगभग 4 दिन बाद लगभग सुबह 9 बजे उठ कर मैं छत पर घूम रहा था कि वो अंटी फिर से कपड़े सुखाने आईं.उन्हें देख कर फिर मेरा मन बढ़ गया.मैंने सोचा कि साली उस दिन मुझसे नहीं बोली थी तो आज भी नहीं बोलेगी.फिर भी मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा और कमाल कि बात ये कि मेरा तीर सही निशाने पर जा लगा.तीर ये था कि मैं उन्हें देख कर फिर से मैं अपना लोड़ा सहलाने लगा.आज वो मेरी ओर नहीं देख रही थीं.

फिर अचानक से उनकी नजर मुझ पर गई और खेल हो गया.अंटी जोर से तमतमाती हुई मेरी ओर आकर बोलीं- ये सब क्या है?मैं बेशर्मी से लोड़ा सहलाता रहा और बोला- कुछ नहीं.फिर अंटी ने बोला- मैं तुम्हारी फितरत समझती हूं. ये सब क्या कर रहे हो?मैंने लोड़ा सहलाता रहा और बोला- फितरत … इसमें मेरी क्या गलती है … आप हो ही इतनी सुंदर कि आपको देख कर मैं अपने आप पर कण्ट्रोल नहीं कर पाता हूँ. अब आप जो भी समझो.

अंटी जी तनिक गुस्सा दिखाती हुई मुस्कुरा दीं और बोलीं- अच्छा … क्या क्या सुंदर लगता है मुझमें?

मैंने भी लंबी लंबी फैंक दी.मन में तो एक ही उत्तर था कि तेरी गांड सुंदर … पर चुत के लिए लौंडियों की तारीफों के पुल तो बांधने ही पड़ते हैं. वो तो आप सब भी जानते हैं. फिर अंटी चोदने लायक माल तो थीं ही.कुछ पल के बाद उन्होंने मेरा नाम पूछा- तुम्हारा क्या नाम है?

मैंने नाम बताया.

उस दिन अंटी से लगभग आधा घंटे तक मेरी बात हुई. मैंने अपने बारे में उन्हें सारी डिटेल वगैरह बताई.यूं ही बात करते करते मैंने उनके बारे में भी जाना.अंटी का नाम हुमा खान हैअभी घर में हस्बैंड और वाइफ दो ही लोग हैं.इसके बाद हम दोनों चले गए.

मुझे देसी सेक्सी अंटी की गांड मेरे सपने तक में आने लगी थी.

एकदम मटकी की तरह गोल गांड याद करके चुदाई का मन करने लगता था.ऐसा लगता था कि अंटी को पकड़ कर एक बार में सारा गांड का गूदा खा जाऊं. चूत पकड़ूं और चबा जाऊं.. गांड तो चांटे मार-मार कर लाल कर दूं..उनकी चुत चोदने के लिए मैं बहुत अधिक बेताब हो गया था पर मैं सही मौके के इंतजार में था.

मैं पूरी जानकारी के लिए जुट गया.मुझे पता लगा कि अंटी के शौहर बिजनेस करते थे और लगभग दो दिन बाद उनके पति को अपने शॉप के लिए सामान लेने दिल्ली जाना था.इस बीच अंटी मुझसे काफी खुल गई थीं और मैं भी उनसे जब तब उनके हुस्न को दिखाने के लिए कहता रहता था.वो गुस्सा होतीं तो मैं कह देता कि आपके हुस्न का दीदार करने का जी करता है.अंटी हंस देतीं और मुझे अपने मम्मे दिखाने लगतीं.

इससे मुझे समझ आ गया था कि अंटी चुदने के लिए मचल रही हैं.खैर … जब अंकल बाहर गए तो मुझे मौक़ा मिल गया था.मैंने भी तबियत खराब का बहाना मार कर ऑफिस से छुट्टी ले ली.वैसे भी कोरोना काल में थोड़ी सी तबियत खराब बताओ, तो अधिकारी अपनी गांड फटी के चक्कर में छुट्टी दे देते हैं कि कहीं इसे कोरोना तो नहीं हो गया है.

शाम को ऑफिस से आते समय एक बोतल दारू की ले ली.

चोदते समय एडवेंचर का अनुभव होता है.फिर अगले दिन सुबह पैकिंग करके अंकल जी दिल्ली चले गए.जाते समय उन्होंने मुझे भी बोला कि घर का थोड़ा ध्यान रखिएगा.मैंने भी हां में सर हिला कर उनका बैग ऑटो में रख दिया.उसके तुरंत बात मैं और हुमा अंटी अन्दर आ गए.मैंने दरवाजा बंद कर दिया.हुमा अंटी रसोई में चली गईं.मैं भी दो मिनट रुक कर उनके पीछे चला गया.

हुमा अंटी अपनी मैक्सी ऊपर करके आटा सान रही थीं.उनकी आधी से ज्यादा जांघें साफ़ दिख रही थीं.मैंने पैंट और चड्डी रसोई के बाहर ही उतार दिए और अचानक से उनके पीछे आ गया.

अपने दोनों हाथों से मैंने अंटी के दोनों चूचों को कसके पकड़ लिया.मैं अपने खड़े लोड़ा को अंटी के कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा.ये सब इतना अचानक से हुआ कि वो एक मिनट तक तो कुछ बोल ही नहीं पाईं.

फिर पलट कर बोलीं- ये क्या कर रहे हो तुम?

अंटी थोड़ा चिल्ला कर बोली थीं तो मेरी भी गांड फट गई.

मैंने सोचा कि ये तो मामला गड़बड़ हो गया.फिर मैंने भी मन में सोचा कि जो होगा, सो देखा जाएगा. मैं रुका नहीं बस उन्हें मसलता रहा.थोड़ी देर बाद हुमा अंटी बोलीं- रुक जाओ यार … मैं पीरियड से आज ही फ्री हुई हूँ. पहले मुझे नहाकर फ्रेश हो जाने दो. फिर जितना मन करे … उतना कर लेना.इधर मेरा लोड़ा फटा जा रहा था, मैंने कहा- चल हुमा … आज तेरी गांड खोल कर मारूँगा. इस गांड का गौशाला नहीं बना दिया तो मैं एक लंड की औलाद नहीं

वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दीं और बोलीं- प्लीज प्लीज … बस मैं नहा लूं.मैं बोला- आप एक काम करो, तेल लेकर आ जाओ और मेरी मुठ मार दो. अभी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है.हुमा अंटी बोलीं- ठीक है … आती हूँ लौंडे.वो देसी सेक्सी अंटी हाथ धोकर तेल लेकर आ गई.मैं उन्हें बिस्तर पर ले गया और लेट कर बोला- तेल मत लगाओ, आप मेरा लोड़ा चूस दो.अंटी बोलीं- छी छी … मैं ये सब कभी नहीं करूंगी.

मैं इस वक्त हवस की आगोश में था. तुरंत तुरंत अंटी को बिस्तर पर खींचा और दोनों हाथों से उनके चूचों को मसलता हुआ उनके ऊपर चढ़ गया.मैंने अपना लोड़ा जबरदस्ती अंटी के मुँह में घुसा दिया.अंटी ने खूब हाथ पैर पटके. वो मुँह इधर उधर करने की कोशिश कर रही थीं, पर मैंने दोनों हाथों से उनके गाल दबा कर उनका मुँह खोल दिया और उनके गले तक लोड़ा ठांस दिया.

अंटी के मुँह में अपना पूरा लोड़ा घुसा कर मैं उनके मुँह में अन्दर बाहर करने लगा.कोई दस मिनट तक घमासान तरीके से अंटी के मुँह की चुदाई करता रहा.दोस्तो, लोड़ा चुसवाने में इतना आनन्द की अनुभूति होती है कि मैं उसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता.बस अब मैं अपने अंतिम चरण में था. मेरा लोड़ा झड़ने ही वाला था.मैंने एक जोर का धक्का दिया और अपना लोड़ा अंटी के गले तक उतार दिया.मेरा वीर्य छलक पड़ा और पूरा वीर्य मैं अंटी के मुँह में भर दिया.

जब तक पूरे माल की एक एक बूंद अंटी गटक नहीं गईं, तब तक मैंने उनके मुँह से लोड़ा बाहर नहीं निकाला.उसके बाद मैं बिस्तर पर लेट गया.मुझसे छूटते ही हुमा अंटी तुरंत बाथरूम की तरफ भागीं.वो शायद मुँह धोने चली गई थीं.अंटी को इस तरह से देख कर मुझे लगा कि इन्होंने पहली बार लोड़ा चूसा होगा और शायद लोड़ा के माल का स्वाद भी पहली बार ही लिया है.बाथरूम से आकर अंटी मुझे गुस्से से देख कर रसोई में चली गईं.

मैं भी थोड़ी देर में उठ कर ऊपर अपने रूम में आ गया.

इधर मैं नहा धोकर फ़्रेश हुआ और एक घंटे की गहरी नींद ली.

जब मैं सो कर उठा तो सोचा कि अब नीचे चल कर हुमा अंटी की चुत चोदने का इंतज़ाम किया जाए.जब मैं नीचे गया, तो वो भी अपने रूम में हल्का सा दरवाजा लगाए सो रही थीं.मैंने दरवाजे को खोल कर देखा तो उनकी जांघें पूरी नंगी दिख रही थीं.अंटी की हल्की सी मरून कलर की पैंटी भी दिख रही थी.

यह नजारा देख कर मेरा लोड़ा टनटनाटन होने लगा.मैं कमरे में घुस गया और धीरे से आकर हुमा अंटी के बगल में लेट गया.

मैंने अंटी की जांघों पर अपनी जांघ रख दी और मैक्सी के अन्दर हाथ डाल कर उनके रसभरे चूचों को सहलाने लगा.अंटी गहरी नींद में थीं. उन्हें शायद मेरी हरकतों का अहसास ही नहीं हो रहा था पांच मिनट बाद मैं धीरे धीरे अंटी के ऊपर चढ़ने लगा.तभी हुमा अंटी की नींद खुल गई और वो मुझे देख कर बोलीं- साले, जब से हाथ फेर रहा है. अब चढ़ जा और आज ढंग से चोद दे. तेरे लवड़े का लाल टोपा चूसने में आज मजा आ गया.

अब मैं भी खुल गया और अंटी के चूचों को चूसने लगा.मम्मों को चूसते हुए मैंने उनके पेट पर अपने होंठों को रख दिया.हुमा अंटी अभी से मछली की तरह तड़प रही थीं. जैसे वो बहन की लोड़ी पहली बार लोड़ा ले रही हो चूत में, और एक बात बताऊं जब तक चुदाई के वक्त औरत तड़पे ना.. तबतक चुदाई का मजा ही नहीं..इधर मैं उनकी नाभि से होते हुए उनकी चुत की फांकों के पास आ गया.अंटी अपनी पूरी चुत को क्लीन शेव करके चुदने की पहले से तैयारी कर चुकी थीं.

मैंने अंटी की चुत पर जैसे ही अपने होंठों को रखा, अंटी ने एकदम से सीत्कार भर कर मेरे सर को अपने दोनों हाथों से अपनी चुत पर दबा लिया.जैसे आज मेरी पूरी खोपड़ी अपनी चूत में ही घुसा लेंगी..अब हुमा अंटी कामुक आवाज में बोलीं- आंह साले … खा जा मेरी चुत को … आह पूरी चाट ले … आह ह ह … मैं बहुत दिनों से चटवाने को तड़फ रही थी. आह आज चाट ले मेरी जान … आज से मैं तेरी रांड हूँ, जब चाहे चोद लेना. आंह चाट जोर से चाटो.

मैंने भी उनकी बुर को पूरी तरह से चाट चाट कर लाल कर दिया.इतना चाटा की तीन बार चटवाते चटवाते ही अंटी का माल झड़ गया.. पूरा बिस्तर गीला हो गया..तकरीबन 10 मिनट की बुर चटाई के बाद अचानक अंटी का जिस्म अकड़ने लगा और अगले ही पल तीसरी बार चुत से जोर से पानी का फव्वारा छोड़ दिया.अंटी फिर से झड़ कर निढाल हो गईं.

कुछ देर रुक कर मैंने अपना लोड़ा अंटी के मुँह पर रख दिया.

मैंने कहा- अब आपकी बारी.

हुमा अंटी ने भी एक बार में लोड़ा को मुँह में ले लिया और चूसना चालू कर दिया.तकरीबन दस मिनट तक लोड़ा चुसवाने के बाद मैं आने वाला था तो वो समझ गईं.

अंटी ने बोला- फिर से मुँह में निकालेगा क्या?

मैंने- रुको हुमा जान.मैं तुरंत उठा और जो दारू की बोतल लाया था, मैं उसे ले आया.

मैंने एक पटियाला पैग खींचा और सिगरेट सुलगा कर अपना लोड़ा हुमा अंटी की चुत में सैट कर दिया.अंटी ने भी अपनी चुत खोल दी थी.मैं एक जोर का धक्का मारा तो मेरा आधा लोड़ा चुत फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया.

अंटी जोर से चिल्लाने लगीं- आं मार दिया भोसड़ी के … आह निकाल हरामी साले … चुत फट गई मेरी … आह … जल्दी निकाल.मैं सिगरेट का कश लेते हुए बोला- रुक जाओ मेरी जान.मैंने धीरे धीरे करके एक मिनट में अपना पूरा लोड़ा हुमा अंटी की चुत में सैट कर दिया.मां कसम अंटी इतना चीखीं जितना कोई 15 साल की लड़की पहली बार लोड़ा लेते वक्त चीखती हो..

अंटी की चुत बहुत दिनों से चुदी नहीं थी … इसलिए बुर टाइट हो गयी थी.कुछ देर रुक कर मैंने सिगरेट मसल दी और फिर से धक्के लगाना शुरू कर दिए.अब हुमा अंटी को भी मजा आने लगा.

मैंने भी अपनी रफ्तार धीरे धीरे बढ़ाना चालू कर दी.मेरे लौड़े के नीचे पड़ी हुमा अंटी भी गांड उठा उठा कर मजा लेने लगीं.कसम से वो रचना याद आ गई स्कूल वाली जिसे वॉशरूम में खड़ा करके चोदा था.. खैर वो hindi sex story, hindisexxxkahani.com पर फिर कभी सुनाऊंगा लेकिन अभी हुमा अंटी का रंडी रोना सुन लो..अंटी- आह चोद साले और चोद चोदरा साले … फाड़ दे भोसड़ी वाले … आज आह आह आज मेरी चुत फाड़ ही दे … आंह लोड़ा की ताकत दिखा लवड़े.

हुमा अंटी की गाली और दारू के नशे के कारण मेरा जोश दुगुना हो गया. मैं लगातार उनकी चुत पर लोड़ा का प्रहार किए जा रहा था.एक पटियाला पैग लगाने के बाद मेरी भी टाइमिंग दोगुनी हो गयी थी. मैं भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

फिर अचानक से अंटी का शरीर अकड़ने लगा.

हुमा अंटी बोलीं- आंह और जोर से चोद साले … रुकना मत मादरचोद.मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी. लगभग 10-15 धक्कों के बाद हुमा की चुत ने पानी का फव्वारा छोड़ दिया … पर मेरा तो अभी हुआ नहीं था.हुमा अंटी ने कहा- आंह बस कर … मेरी चुत में जलन होने लगी है.मगर मुझे बिना झड़े किधर चैन मिलने वाला था.मैंने बोला- रुक जा मेरी जान … अभी मेरा माल तो निकल जाने दे.

मैंने तुरंत ही अंटी को बिस्तर पर पलटी किया और चुत के पानी को लोड़ा के द्वारा उनकी गांड पर लगा दिया.फिर मैंने एक हचक कर शाट मारा तो आधा लोड़ा उसकी गांड में घुस गया.हुमा अंटी जोर से चीख पड़ीं- हाय अम्मी मर गई … बाहर निकाल लवड़े … आह मार ही डालेगा मुआं निकाल मादरचोद … आह दर्द हो रहा है.मैंने भी जोर से पकड़ कर अंटी के पेट को अपने हाथों से जकड़ रखा था.एक और शॉट के बाद मैंने अपना पूरा लोड़ा अंटी की गांड में घुसा दिया.अंटी तड़पती रहीं और मैं लोड़ा पेले रहा.

धीरे धीरे करने के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.दस मिनट तक लगातार गांड चोद कर मैंने अंटी की सील पैक गांड को फैला दिया.अंटी ने अब तक अपनी गांड कभी नहीं मरवाई थी.मैं उनकी चुत में उंगली भी करता जा रहा था. इससे अंटी को मजा आने लगा था और वो भी मस्ती से अपनी गांड मरवाने लगी थीं.अब मैं आने वाला था. मैंने लोड़ा निकाल कर उसे चादर से पौंछा और अंटी के मुँह में डाल दिया. मैं उनसे मुख मैथुन करवाने लगा.एक मिनट बाद मेरे लौड़े ने जोर का फव्वारा छोड़ा और पूरा वीर्य अंटी के हलक में उतरता चला गया.

इसी के साथ मैंने पूरा लौड़ा अंटी के मुँह में गले तक पेल दिया. जब तक अंटी ने माल गटक नहीं लिया, मैंने लवड़े को बाहर नहीं निकाला.उसके बाद हम दोनों बिस्तर पर निढाल होकर सो गए. एक घंटे बाद जब मैं उठा तो देखा कि हुमा अंटी मेरे बालों को सहला रही थीं.मैंने उन्हें फिर से अपनी बांहों में भर लिया और एक बार फिर से हम दोनों चुदाई की हकीकत में डूब गए.उसके बाद तो जब तक अंटी के हसबैंड दिल्ली से लौट कर नहीं आ गए, दिन में 3 से 4 बार चुदाई हो ही जाती थी.

अब तो हुमा अंटी खुद मेरे कमरे में आकर चुत खोल कर बैठ जाती हैं.लगभग 4-5 महीने जम कर चोद कर अंटी की चुत से पूरा किराया वसूला.कुछ समय बाद जुगाड़ लगा कर मैंने अपना ट्रांसफर नागपुर करवा लिया. पर अंटी की चुत आज भी याद आती है.बस अब उनसे फ़ोन पर ही बातें होती हैं.