चाची की चूत को बना दिया चबूतरा

चची जान बोलीं- तू क्या मुझे चूतिया समझता है. जब तू छिप कर मुझे किचन में और झाड़ू लगाते देखता था तो तुझे मैं अपनी जवानी के दर्शन क्या ऐसे ही करवाती रहती थी. तुझे क्या लगता था कि मैं तुझे देख नहीं रही हूँ कि तुम मेरी चूचियों को और मेरी कमर को देख रहे हो?

AUNTY SEX

Unknown

3/19/20261 min read

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अरबाज़ है, मैं लाहौर का रहने वाला हूं.दिखने में ठीक-ठाक हूं, उम्र 22 साल है. लंड 6 इंच लंबा है. अभी अभी अपनी इंजीनियरिंग कंप्लीट की है.

मेरे माता पिता इस्लामाबाद में रहते हैं और मैं लाहौर में अपने दादा-दादी और चचा-चची जान के साथ रहता हूं. मेरे चचा चची जान का एक बेटा भी है.

चची जान का नाम शमा है और उम्र कुछ 42 साल के आस-पास की होगी.

वे एवरेज हाइट वाली हैं और उनका फिगर 34-30-40 का है. दिखने में चची जान एक बहुत ही मस्त कांटा माल लगती हैं.

चूंकि मुझे अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी उम्र की औरतें चोदना ज्यादा पसंद आती हैं इसलिए चची जान मेरे दिल में बस गई थीं.

मैं जब लाहौर एडमिशन लेने आया था तब मैं चचा के घर खाना खाने गया था.

उस टाइम चची जान घर में अकेली थीं. मैं चची जान को पिछले तीन साल से चाहता था और उस दिन हिम्मत करके मैंने चची जान को अपने दिल की बात बताई.

वो मेरी बात सुनकर हंस पड़ीं और मुझे लगा कि चची जान सैट हो गईं तो मैंने उसी पल आगे बढ़कर उन्हें एक लिप किस कर दिया.

एकदम से किस कर देने से मेरी चची जान गुस्सा हो गईं और उन्होंने मुझे एक थप्पड़ मार दिया.

चची जान चिल्लाने लगीं- तू पागल हो गया है क्या … मैं सबको बता दूंगी कि तूने क्या किया है.

उनके इस बदले हुए रूप से मैं बहुत डर गया था लेकिन उसी वक्त दादा-दादी वापस घर पर आ गए थे तो मैंने तुरंत चची जान से माफी मांगी और उनसे वादा किया कि आगे से वापस ऐसा कभी नहीं होगा.

फिर मैं दरवाज़ा खोलने चला गया.

इसके बाद मैं उदास मन से वापस इस्लामाबाद चला गया.

जब कॉलेज शुरू होने वाले थे, तब मैं लाहौरफिर से आ गया.

उस दिन के बाद से मैं बहुत डर गया था और बहुत चुपचाप रहने लगा था.

मैं चची जान के सामने आने में कतराने लगा था लेकिन मैं अभी भी चची जान को पाना चाहता था.

उन्हें छुप छुप कर किचन में खाना बनाता देखता, झाड़ू लगाते देखता रहता था.

चची जान हमेशा साड़ी पहनती थीं और जब वह खाना बनाती थीं, तब उनका चिकना पेट साफ दिखता था.

उनके टाइट ब्लाउज़ से उनके चूचीभी बहुत अच्छे लगते थे.

चची जान को भी शक था कि मैं उन्हें छुप छुप कर देखता हूं, लेकिन मैं कभी पकड़ में नहीं आया.

दोस्तो, चार साल की इंजीनियरिंग में मैंने अपनी चची जान के नाम की कई बार मुठ मारी होगी लेकिन मैं उन्हें कभी चोद नहीं पाया.

इस वर्ष में अपनी इंजीनियरिंग के आखिरी साल में था.

फिर अचानक से लॉकडाउन लग गया.

लॉकडाउन की वजह से चचा और उनका बेटा छत्तीसगढ़ में फंस गए थे.

दादा दादी मेरे दूसरे रिश्तेदार के घर मेरठ में फंस गए थे.

अब लाहौर में सिर्फ मैं और मेरी चची जान बचे थे.

मैं यह मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था.

लेकिन मैं अभी भी चची जान के साथ किसी भी तरह का प्रयास करने से डर रहा था.

छह दिन ऐसे ही बीत गए लेकिन जैसा कि मैंने पहले बताया कि मैं चुपचाप ही रहता था, ज्यादा किसी से बात नहीं करता था.

अभी लॉकडाउन में भी मैं ऐसा ही था.

इसी कारण चची जान थोड़ी बोरियत महसूस करने लगी थीं क्यूंकि घर में उनसे बात करने वाला कोई नहीं था.

सातवें दिन चची जान ने ही आगे से जेंगा खेलने के लिए कहा.

इस खेल में लकड़ियों के चौकोर टुकड़े होते हैं, जिनको तीन तीन के समूह में खड़ा करके एक टॉवर बनाया जाता है. फिर एक एक करके खिलाड़ी टॉवर में से एक टुकड़ा निकाल कर उसे वापस टॉवर के ऊपर रख देता है. इस दौरान जो खिलाड़ी टॉवर गिरा देता है, वह हार जाता है.

मैंने इस खेल को खेलने के लिए चची जान से हां कर दी.

चूंकि जब तक किसी खेल में हंसी-ठट्ठा न हो, तब तक मजा ही नहीं आता है.

मैं पूरे खेल के दौरान चुप रहा और इसी वजह से खेल में कुछ मजा नहीं आ रहा था.

मैंने देखा कि चची जान खेलते समय कुछ ज्यादा ही झुक रही थीं जिससे उनके मम्मे मुझे साफ़ नजर आ रहे थे.

मगर मैं चुप रहा और उनकी चुचियों से नजर हटा कर खेलता रहा.

थोड़ी देर बाद चची जान खेल से बोर होने लगीं.

तब मैंने आगे बढ़ कर कहा- क्यों ना हम शर्त लगाकर जेंगा खेलें, जो पहले टॉवर गिराएगा, वह अपना एक कपड़ा खोलेगा.

चची जान ने धत्त कह कर मुझे डांट दिया और उठकर जाने लगीं.

वो हंस भी पड़ी थीं, तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उन्हें मनाया.

शायद लॉकडाउन के अकेलेपन में चची जान ने हां कर दी.

दोस्तो, मेरी तो जैसे किस्मत ही चमक गई.

हमने खेल शुरू किया तो मैंने पहले जानबूझ कर टॉवर गिरा दिया और तुरंत ही अपनी टी-शर्ट खोल कर चची जान को पकड़ा दी ताकि चची जान गेम खेलती रहें.

अगला टॉवर चची जान ने गिरा दिया, तो मैंने उनसे उनकी साड़ी मांगी, जो उन्होंने खोलकर दे दी.

अगले दो गेम भी मैं ही जीता और चची जान का पेटीकोट और ब्लाउज खुलवा लिया.

अब चची जान केवल लाल कलर की ब्रा और ब्लैक कलर की चड्डी में मेरे सामने थीं.

चची जान को ऐसे देख कर हड़बड़ाहट में मैं अगले दो गेम हार गया.

अब मेरे शरीर पर भी केवल एक चड्डी ही बची थी.

ये तय था कि अगर मैं अगला गेम हार जाता तो खेल खत्म … और चची जान उठ कर चली जातीं.

लेकिन चची जान अगला गेम हार गईं और उनको अपनी ब्रा मुझे देनी पड़ी.

उनके मदमस्त कर देने वाले चुचे मेरे सामने खुल गए थे.

पर चची जान ने मेरी नजरें पड़ते ही अपने हाथ से अपने मम्मे छिपाने का असफल प्रयास किया.

मैं मुस्कुरा दिया.

चची जान भी शर्मा गईं लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा तो चची जान भी सहज हो गईं.

मुझे लगने लगा था कि चची जान चुदासी हो रही हैं इसलिए ही उन्होंने मेरे साथ ये कपड़े उतारने वाला खेल खेलना स्वीकार किया था.

अब अगला गेम आखिरी खेल था.

चची जान एक हाथ से खेल रही थीं और एक हाथ से उन्होंने अपने चूचीढक रखे थे.

लेकिन चची जान अगला गेम भी हार गईं और उठकर भागने लगीं.

मैंने उन्हें पकड़ लिया क्यूंकि मेरी वासना पूरी तरह से परवान चढ़ चुकी थी.

चची जान मना करने लगीं- ये क्या कर रहा है तू … कपड़े उतारने की बात थी पकड़ने की बात कहां थी.

मैंने कहा- हां तो आप भाग क्यों रही हैं. अपनी चड्डी भी तो उतारो न!

चची जान चड्डी उतारने से मना कर रही थीं मगर मैं उन्हें दबोचे हुए था और उन्हें भागने ही नहीं दे रहा था.

मैंने महसूस किया कि चची जान मुझसे छूटने की कोशिश कर तो रही थीं लेकिन उनकी छूटने की ताकत न के बराबर थी.

ये समझ आते ही मैंने चची जान की चुचियों पर हमला बोल दिया.

अब मैं एक हाथ से उनके मम्मे दबा रहा था और एक हाथ से चड्डी खोलकर उनकी चूत में उंगली करने लगा था.

थोड़ी देर बाद चची जान भी मेरा साथ देने लगी थीं.

उनकी मादक आवाजें मुझे गर्माने लगी थीं.

मैंने चची जान को घुमा लिया और उनको किस करने लगा.

अब चची जान भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.

चची जान हंस कर बोलीं- आखिर तूने अपने मन की कर ही ली.

मैंने कहा- चची जान, मेरे मन की तो आपने वाट लगा दी थी. मैं तो आपसे बात करने में भी डरने लगा था.

चची जान हंस दीं और बोलीं- तूने यदि एकदम से मुझे किस न कर दिया होता … तो शायद तू मुझे तभी पा लेता. उस वक्त मैं भी समझ नहीं सकी थी कि क्या करूं. इसलिए मेरा हाथ उठ गया था.

मैंने भी कहा- हां चची जान वो मेरी गलती थी. फिर दादा दादी आ गए थे तो मुझे लगा कि रायता और ज्यादा न फ़ैल जाए इसलिए मैंने आपसे माफ़ी मांग ली थी.

चची जान- हां, वो तेरे दादा दादी आ गए थे वर्ना मैं भी कुछ देर बाद तुझे समझाती और शायद तुझे मुझसे बात करने में इतना डर न लगता.

मैंने कहा- तो क्या चची जान आप भी मुझे पसंद करती थीं.

चची जान बोलीं- हां, तुझमें क्या दिक्कत थी, जो मैं तुझे पसंद न करती. बस तेरा वो एकदम से कदम उठा देना मुझे जरा अच्छा नहीं लगा था.

अब मैंने कहा- फिर आपने मेरे लाहौरआने के बाद भी कोई सिग्नल नहीं दिया?

चची जान हंस कर बोलीं- सिग्नल तो तुझे बराबर देती रही थी लेकिन तेरी कुछ ज्यादा ही फट गई थी.

मैंने पूछा- आपने कब सिग्नल दिया था?

चची जान बोलीं- तू क्या मुझे चूतिया समझता है. जब तू छिप कर मुझे किचन में और झाड़ू लगाते देखता था तो तुझे मैं अपनी जवानी के दर्शन क्या ऐसे ही करवाती रहती थी. तुझे क्या लगता था कि मैं तुझे देख नहीं रही हूँ कि तुम मेरी चूचियों को और मेरी कमर को देख रहे हो?

मैंने सेक्सी चची जान को चूमा और कहा- सच में चची जान … मैं तो समझ ही न सका. मैंने अब तक आपके नाम से न जाने कितनी बार अपना हिलाया है.

चची जान हंस दीं और मुझे चूमती हुई बोलीं- अब हिलाने की नहीं पेलने की बात कर!

मैं चची जान को चूमने लगा और चची जान मुझसे लता सी लिपट गईं.

हम दोनों पागलों के जैसे एक दूसरे को किस करने लगे और मैंने चची जान को बिस्तर पर लेटा दिया.

अब मैं उनके नंगे मम्मों को चूसने लगा और वह मुझे अपना दूध पिलाती हुई मादक सिसकारियां लेने लगीं.

फ़िर मैं चची जान की टांगों को चूमते हुए उनकी चूत तक आ गया और उनकी चूत चाटने लगा. चची जान इस हरकत से पागल हो गईं और मचलने लगीं.

चची जान ‘उह … आह … उंह …’ की कामुक आवाजें निकालने लगीं.

मैं सेक्सी चची जान की चूत चाटने के साथ उसमें उंगली भी करने लगा.

चची जान कराहती हुई बोलीं- अब और मत तड़पा … जल्दी से लंड डाल दे. अब मेरी चूत में आग लग गई है.

मैंने जरा सी भी देर ना करते हुए पोजीशन बनाई और एक ही झटके में चची जान की चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया.

चची जान जोर से चिल्ला पड़ीं- आह मर गई … साला तू बहुत जल्दी में रहता है … हर बार यही करता है.

मगर आज मैं नहीं रुका और उनको जोर जोर से चोदता रहा.

चची जान दर्द से चिल्ला रही थीं- आह आह आह रुक जा हरामी … दर्द हो रहा है.

मगर कुछ ही देर में मजे का आलम छा गया था.

अब चची जान ने अपने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए और और जोर जोर से सिसकारियां लेते हुए बोल रही थीं- आंह हां अरबाज़ ऐसे ही … आह और जोर से पेलो.

मैं भी थोड़ी देर के लिए भूल गया था कि वो मेरी चची जान हैं.

अब मैं भी उन्हें नाम से ही बुलाते हुए चोदने लगा.

‘आह मेरी शमाडार्लिंग … तेरी चुत में बड़ी आग है साली … ले लंड खा मां की लौड़ी.’

उधर चची जान भी गाली देने लगी थीं- आं भैन के लंड मादरचोद साले चोद … मेरी चुत को … कुत्ते आह … हरामी तेरे लंड में बड़ी जान है.

कुछ देर यूं ही चुदाई के बाद मैंने चची जान को अपने ऊपर ले लिया और उन्हें लंड पर बैठने का इशारा कर दिया.

चची जान मेरे लंड पर बैठ गईं और अपनी गांड हिलाती हुई खुद मस्ती से चुदने लगीं.

उनके उछलती हुई चूचियां मुझे मस्त कर रही थीं तो मैं उनके चूचीदबाने लगा.

चची जान मेरे ऊपर झुक गईं तो मैंने उनके होंठ चूमे और उनके चूचीपकड़ कर चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.

कुछ पांच मिनट तक लंड की सवारी करने के बाद चची जान थक गईं तो मैं एक बार फ़िर से चची जान को नीचे लेकर उनके ऊपर चढ़ गया.

चची जान की चूत में लंड से धक्का लगाते लगाते मैं उनको किस करने लगा और उनकी गर्दन को भी चूमने लगा.

वह गर्मागर्म आवाजें किए जा रही थीं- आह ईह आह ओह … अरबाज़ मेरी जान … आज फाड़ दे मेरी चुत को आह बहुत तड़पाती है ये निगोड़ी चुत … तेरे चचा से तो अब कुछ बनता ही नहीं है.

मैं शमाचची जान के चूचीचूसने लगा और उन्हें ताबड़तोड़ चोदने लगा.

इससे उनको और मज़ा आने लगा.

आधे घंटे तक धक्के लगाने के बाद मैंने अपना वीर्य चची जान की चूत में ही छोड़ दिया और थोड़ी देर चची जान के ऊपर ही पड़ा रहा.

उनके चूचीऔर लिप्स पर किस करता रहा.

फिर चची जान बोलीं- अब उठ मुझे बाथरूम जाना है.

मैं चची जान की चुत से लंड निकाल कर बगल में लेट गया.

चची जान उठ कर बाथरूम चली गईं.

इसके बाद मैंने चची जान को पूरे लॉकडाउन में हर रोज़ चोदा और लॉकडाउन खुलने के बाद भी जब सब वापस आ गए, तब भी मैं मौक़ा पाते ही उन्हें चोद देता था.

(यह कहानी काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।)