रेशमा की रेशमी चूत को बीच मैदान ठोका
मैं सोचने लगा था कि काश इसकी चुदाई करने को भी मिल जाती.वैसे वो मुझसे बातें करती रहती थी और पूछती रहती थी कि किसी चीज़ की जरूरत हो तो बता देना.
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Unknown
6/21/20261 min read
दोस्तो, मेरा नाम अवधेश है मेरी उम्र 22 साल है में एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूं और मैं उत्तराखंड का रहने वाला हूं.
ये घटना उस समय की है जब मैं एक गांव में कंपनी की तरफ से प्रोजेक्ट के लिए गया था.
ये प्रोजेक्ट कम से कम 20 दिन का था.
हमारे काम में हमें कोई भी एरिया दिया जा सकता था तो इस बार मुझको एक गांव दिया गया था.
वहां का सर्वे मुझे अकेले ही करना था.
मुझको कम्पनी से ये प्रोजेक्ट मिला तो उसे पूरा करने के लिए मैं उस गांव के लिए रवाना हो गया.
मैंने उस गांव जाने की बस पकड़ी और चल दिया.
उस बस में बहुत भीड़ थी, बड़ी मुश्किल से मुझे सीट मिली.
थोड़ी देर चलने के बाद बस एक स्टॉप पर रुकी तो मैं चाय पीने के लिए उतर आया.
जैसे ही मैं चाय पी कर वापिस बस में आया तो मेरी सीट में एक लड़की बैठी हुई थी.
चूंकि बस में बहुत भीड़ थी तो उसे सीट न मिलने के कारण वो वहां बैठ गई थी.
मैं जैसे ही उसके पास गया, तो मैंने देखा कि वो लड़की बड़ी मस्त कांटा माल थी, बहुत ही खूबसूरत थी.
उसके लाल लाल गाल, उसके चूचे भी बड़े टाईट दिख रहे थे.
उसकी उम्र लगभग मेरी ही उम्र के आस-पास की लग रही थी.
उसने लैगी कुर्ती पहनी हुई थी क्योंकि हमारे उत्तराखंड में लड़कियां अब लैगी कुर्ती सूट पहनना ज्यादा पसंद करने लगी हैं.
सच में वो लौंडिया बड़ी मस्त हॉट और सेक्सी लग रही थी.
मुझे लगा कि मैं उसे यहीं बैठने देता हूं. आखिर लड़की को तो सीट देनी चाहिए.
उसकी उस साइड पर मेरा बैग भी रखा था.
मेरे दूसरे साइड में एक अंटी की सीट थी.
मैंने उस लड़की को देखा तो वो मेरी तरफ देखने लगी.
उसे लगा कि अब मैं उससे उठने के लिए कहूँगा.
मगर मैंने उससे कहा- आप बैठी रहो … मेरे बैग का ध्यान रखना.
वो मेरी तरफ मुड़ी और बोली- अच्छा यहां पर आपकी सीट थी, सॉरी मुझे पता नहीं था.
मैंने बोला- कोई बात नहीं आप बैठी रहो. मैं पहले से ही बैठ बैठ कर थक गया हूँ.
इस पर वो बड़े प्यार से मुस्करा कर बोली- थैंक्स.
दोस्तो, उसकी मुस्कराहट में क्या जादू था. मेरा उस लड़की पर दिल आ गया था.
फिर बस वहां से चल पड़ी.
आगे चल कर बस रुकी तो सीट की दूसरे तरफ जो अंटी बैठी हुई थीं, वो वहां उतर गईं.
अब उस जगह पर मैं बैठ गया.
मैंने उससे पूछा- आप क्या करती हो?
वो बोली- मैं एम ए कर रही हूं.
मैंने उसका नाम भी पूछा, उसका नाम रेशमा था.
मैंने बोला- आपका नाम आपके मां-बाप ने बड़ा सोच समझ कर रखा है.
ये सुन कर वो लजा गई और बोली- आप भी ना!
मैंने उससे पूछा- आपको कहां जाना है?
उसने उसी गांव का नाम बोला, जहां मुझे जाना था.
मैंने उससे कहा- अरे मैं भी तो वहीं जा रहा हूं.
वो बोली- लेकिन मैंने आज तक तो आपको वहां कभी नहीं देखा.
मैं बोला- अरे यार, मैं कम्पनी की तरफ से एक प्रोजेक्ट के काम से जा रहा हूं.
अब वो मुस्करा कर बोली- अच्छा ये मतलब है.
मैंने कहा- हां ये मतलब है.
मेरे इस तरह से जवाब देने से वो हंस दी.
हम दोनों अब एक दूसरे से बात करने लगी तो वो बोली- चलो अच्छा है अब हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से जान लेंगे.
मैंने उसकी इस बात को समझ नहीं पाया … मगर चुप रहा.
फिर वो बोली- आप उधर रहोगे कहां?
मैंने बोला- वहां कहीं रूम ले लूंगा.
वो बोली- गांव में कोई रूम किराए में नहीं देते, आपको जानकारी होनी चाहिए.
मैं बोला- ये बात … तो फिर मैं क्या करूंगा?
वो मुस्कुरा कर बोली- कोई बात नहीं, मैं अपने पापा से बात करूंगी. हमारे पास एक कमरा खाली है.
फिर कुछ समय बाद हमारा गन्तव्य आ गया और हम दोनों उस गांव के पास उतर गए.
मैं उसके साथ उसके घर आ गया.
उसने अपने पापा से बात की और उन्होंने मुझे कमरा किराये पर दे दिया.
मुझे उस लड़की का साथ मिल गया था.
अब मैं उसको देख कर रोज आंख सेंक सकता था.
मैं सोचने लगा था कि काश इसकी चुदाई करने को भी मिल जाती.वैसे वो मुझसे बातें करती रहती थी और पूछती रहती थी कि किसी चीज़ की जरूरत हो तो बता देना.
मुझे जिस चीज़ की जरूरत थी, तो बस उसकी चूत गांड की … अगर वो मुझे मिल जाती तो लोड़े को चैन मिल जाता.
चार दिन बीत गए थे.
एक दिन मैं सुबह जैसे ही उठा तो बाथरूम जाने लगा. उनका और मेरा बाथरूम एक ही था.
मुझे नहाने जाना था तो मैं उधर गया, तब तक वो भी अपनी बाल्टी लेकर आ गई.
उस समय वो बड़ी मस्त माल लग रही थी.
उसने टाइट पजामी और छोटा सा कुर्ता पहना हुआ था.
उसकी गांड पजामी में बड़ी मस्त दिख रही थी.
उसके चूचे भी एकदम तने हुए थे, वो तो जैसे मेरी ओर इशारा कर रहे थे और बोल रहे थे कि आ जाओ, हमें दबा लो.
मैंने उसे देख कर कहा- अच्छा आपको नहाना है?
वो बोली- कोई बात नहीं, अगर आपको देरी हो रही हो, तो पहले आप नहा लो.
मैंने कहा- आप ही नहा लो रेशमा जी.
वो मुस्कराती हुई अन्दर चली गई.
मैं देखने लगा … पीछे से उसकी गांड बड़ी मस्त दिख रही थी.
मेरा लोड़े खड़ा हो गया.
मैं अपने रूम चला गया.
थोड़ी देर बाद मैं नहाने आ गया और तैयार होकर अपने काम के लिए निकल गया.
अगले दिन मैंने अपना वर्क हॉलिडे रखा था ताकि मुझे थोड़ा आराम मिल सके.
उस छुट्टी के दिन मैं आराम से उठा और छत पर धूप सेंकने आ गया.
मैंने देखा कि रेशमा भी छत के ऊपर थी. मैंने उसे देख कर बोला- गुड मॉर्निंग रेशमा जी.
वो बोली- काहे की गुड मॉर्निंग यार … मैं तो बोर हो गई. मुझे तो अपने कॉलेज के दिन याद आ रहे हैं. उधर रोज कॉलेज जाते थे और मस्ती कर लेते थे.
अब इधर घर पर बैठ कर बस पढ़ाई करो.
मैं बोला- अच्छा, मतलब अब आप एम ए प्राइवेट रह कर रही हो?
वो बोली- हां यार वही तो!
मैंने अब उससे ऐसे ही पूछ लिया कि आपका कॉलेज में कोई ब्वॉयफ्रेंड था क्या?
वो बोली- मुझे ब्वॉयफ्रेंड बनाने का कोई शौक ही नहीं है. अपने राम तो अपने में ही मस्त रहते हैं.
मैं- ओह ऐसी बात है.
वो इठलाई- हां जी ऐसी बात है.
मैंने बोला- अच्छा अब मैं नीचे चलता हूं, मैं नहाने जा रहा हूं.
मैं वहां से नीचे आ गया और नहाने चला गया.
मैं जैसे अन्दर गया, मुझे दरवाजे पर किसी लड़की की कच्छी टंगी हुई दिखी.
मुझे समझ आ गया कि पक्की ये उसी की ही है.
मेरा लोड़े तो उसकी कच्छी देख कर ही खड़ा हो गया.
मुझसे रहा नहीं गया और उसकी गांड याद करके मुठ मारने में लग गया.
मैंने उसकी कच्छी नीचे उतारी और सूँघने लगा. फिर मैं उसकी कच्छी को अपने लोड़े में रगड़ कर मुठ मारने लगा. कुछ देर बाद मैंने अपना वीर्य
उसकी कच्छी में ही निकाल दिया.
मुठ मारने के चक्कर में मैंने उसकी कच्छी गंदी कर दी थी.
मैंने फटाफट से उसकी पैंटी पानी से धो दी और वापिस लटका दी.
नहाने के बाद मैं अपने रूम में आ गया और देखा कि वहां रेशमा मेरे बेड पर बैठी हुई थी.
मैंने बोला- अरे आप कब आईं.
फिर उसने जबाव ही ऐसा दे दिया कि मेरे पैरों तले जमीन फिसल गई.
वो बोली- मैं तब आई थी, जब आप बाथरूम में मुठ मार रहे थे.
मैं हैरान हो गया कि इसको कैसे पता चला.
मैंने बोला- ये आप क्या बोल रही हो?
वो बोली- अच्छा आपको क्या लगता है कि क्या मैं झूठ बोल रही हूं?
मैं चुप रह गया.
वो मुस्करा कर बोली- मैं छत से तुम्हें देख रही थी.
दरअसल बाथरूम के वेंटीलेशन में अन्दर का नजारा छत से देखा जा सकता था.
फिर मुझे लगा कि ये भी मुझसे चुदना चाहती है.
अब मैं बोला- हम्म … फिर तो तुम्हें ये भी पता ही कि मैं तुम्हारी कच्छी को रगड़ कर मुठ मार रहा था.
वो बोली- हां, मुझे पता है.
मैं बोला- तुम्हें देख कर लगता ही नहीं था कि तुम भी चुदने की शौकीन हो.
वो बोली- अरे यार आज के जमाने में कौन लड़का लड़की एक दूसरे से चुदना नहीं चाहेंगे.
मैंने नाटकीय अंदाज में बोला- ओह ऐसी बात है … तो फिर बताएं कि क्या आप मेरे लोड़े से चुदाई करना पसंद करेंगी?
वो हंस पड़ी और उसने झट से हां बोल दिया.
इससे मुझे पता चल गया कि ये बहन की लोड़ी एक नंबर की रांड है.
मैं दरवाजा बंद करके उसके पास आ गया और उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए, साथ ही उसके चूचे भी दबाने भी शुरू कर दिए.
वो मजा लेने लगी.
मैंने पूछा- सच सच बताना रेशमा … आज तक कितनों से चुद चुकी हो?
वो बोली- बस अपने ब्वॉयफ्रेंड से एक बार.
मैं- ओह … उस टाइम तो बोल रही थीं कि मुझे ब्वॉयफ्रेंड में कोई इंट्रेस्ट नहीं है.
वो बोली- हां मगर चुदने में तो है.
मैं- ओह ये बात है.
मैंने उसके चुचे दबाने शुरू किए.
हम दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए.
वो नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई और अपनी चुत सहलाने लगी.
मैं समझ गया और मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू दी.
उसकी चूत बड़ी रसीली थी, बड़ी मस्त महक आ रही थी.
कुछ ही देर में वो ‘आ आ …’ करने लगी.
थोड़ी देर बाद उसने अपनी चूत से पानी छोड़ दिया.
उसकी चुत का पानी बड़ा ही टेस्टी था.
फिर उसने मेरा लोड़े चूसना शुरू कर दिया.
मुझे लोड़े चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था. मैं भी उसके मुँह के अन्दर ही झड़ गया.
अब मैंने अपना लोड़े उसकी चूत में डालना चाहा.
वो अपनी टांगें खोल कर लेट गई और लोड़े पेलने का इशारा करने लगी.
जैसे ही मैंने लोड़े चुत के अन्दर डाला, उसकी मुँह से आवाज निकल गई.
मैंने बोला- साली बहन की लौड़ी … आराम से चिल्ला, बाहर तेरे मम्मी पापा सुन लेंगे.
वो बोली- वो बाहर गए हैं.
अब मैंने जोर जोर से उसको चोदना शुरू कर दिया.
वो भी मस्ती से चुदने लगी.
मैं दस मिनट बाद झड़ने वाला था.
मैंने उससे बोला- मेरा पानी निकलने वाला है.
वो बोली- अन्दर निकाल दो. मैं दवाई खा लूंगी. मुझे भी लोड़े से निकले पानी का मज़ा लेना है.
मैंने उसको अपनी बांहों में कसके जकड़ा और उसकी चूत में तेज शॉट मारते हुए झड़ गया.
उस दिन मैंने उसकी 3 बार चुदाई की.
अब हम दोनों रोज चुदाई करने लगे थे.
कुछ दिन बाद मेरा प्रोजेक्ट खत्म हो गया था, मैं वहां से चला गया. कभी कभार अपनी रांड से मिलने आ जाता हूं.. लोड़ा चुसा देता हूं..
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